लखनऊ, 01 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में बुधवार को लखनऊ में राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण कार्यक्रम की राज्य स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश भर में पांडुलिपियों के चिन्हांकन, संरक्षण एवं डिजिटलीकरण के कार्यों की प्रगति तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

मुख्य सचिव ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य भारत की समृद्ध और विशाल पांडुलिपि विरासत को आधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ समन्वित करते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सार्वभौमिक रूप से सुलभ बनाना है। उन्होंने निर्देश दिए कि कार्यक्रम के अंतर्गत पांडुलिपियों के चिन्हांकन का कार्य आगामी 16 जून तक अनिवार्य रूप से पूर्ण कराया जाए। साथ ही, दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण पांडुलिपियों की पहचान, उनके डिजिटलीकरण और संरक्षण के लिए आमजन की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा उन्हें इस दिशा में आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी जनपदों में पांडुलिपियों का सर्वेक्षण व्यवस्थित और समयबद्ध ढंग से कराया जाए। इसके लिए प्रत्येक जनपद में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति का गठन शीघ्र सुनिश्चित किया जाए। इस समिति में नगर आयुक्त, अधिशासी अधिकारी, नगर निकायों के प्रतिनिधि, विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, संस्कृत पाठशालाओं के प्रतिनिधि तथा प्राचीन भाषाओं के विशेषज्ञों को सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा, जबकि मुख्य विकास अधिकारी को सदस्य सचिव की जिम्मेदारी दी जाए।
उन्होंने कहा कि भारत की पांडुलिपि विरासत के संरक्षण में जनसहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सर्वेक्षण कार्य में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि पांडुलिपियां अभिलेखागारों, सरकारी एवं निजी पुस्तकालयों, संग्रहालयों, विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, संस्कृत पाठशालाओं, मंदिरों, मठों, आश्रमों, गुरुकुलों, ट्रस्टों तथा निजी संग्रहकर्ताओं सहित पारंपरिक विद्वानों, पुजारियों, ज्योतिषाचार्यों एवं आयुर्वेदाचार्यों के पास उपलब्ध हो सकती हैं।
बैठक में बताया गया कि सर्वेक्षण कार्य 16 मार्च, 2026 से प्रारंभ हो चुका है और सभी जनपदों को अपने-अपने क्षेत्रों में सर्वेक्षण कार्य आरंभ कर ज्ञान भारतम् मोबाइल एप पर संबंधित विवरण अपलोड करना अनिवार्य होगा।
अपर मुख्य सचिव पर्यटन एवं संस्कृति अमृत अभिजात व संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के माध्यम से सभी जिलाधिकारी बैठक में उपस्थित थे।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन
