पानीपत, 09 फ़रवरी (हि.स.)। पानीपत में एक पांच साल के बच्चे ने अनजाने में लोहे की कील निगल ली। यह कील पेट के अंदर जाकर उसकी आंत में फंस गई। जिसको डॉक्टरों ने जटिल प्रक्रिया अपनाकर बाहर निकाल लिया और बच्चे की जान बचाई। सेक्टर 13/17 निवासी अमन ने बताया कि उनके साढ़े चार साल की बच्ची मायर ने खेल-खेल में लोहे की कील निगल ली। जब उसके पेट में दर्द हुआ तब उसने बताया कि वह लोहे की कील निगल चुकी है, उन्होंने जब मायरा के पेट का एक्सरे कराया तो एक्सरे में बच्चे की आंत में लोहे की कील फंसी हुई दिखाई दी।

अमन फानन में अमन बेटी मायरा को लेकर नजदीकी अस्पताल पहुंचे लेकिन डॉक्टरों ने रिस्क लेने से मना कर दिया। दर्द से तड़पती मायरा को लेकर प्रेम सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल पहुंचे और पेट रोग विशेषज्ञ डॉ.माधव को दिखाया बच्ची की हालत को देखते हुए डॉ.माधव ने ऑपरेशन न कर के लोहे की कील को बिना सर्जरी के ओर बिना कोई नुकसान पहुंचाए आंत से बाहर निकालने में सफलता पाई। अब बच्ची बिलकुल स्वस्थ है।
प्रेम सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. माधव के अनुसार, जब परिवार उनके पास आया था तो बच्चा बेहद दर्द में था। वह खाना-पीना तक नहीं कर पा रहा था, केवल रोए ही जा रहा था। परिवार ने बताया कि बच्चे की हालत से वे बेहद परेशान है। उन्होंने बताया कि यह स्थिति जानलेवा हो सकती थी, क्योंकि कील जरा सा भी खिसकने पर आंत को फाड़ सकती थी, जिससे पेट में इन्फेक्शन (पेरिटोनिटिस) फैलने का खतरा था।
डॉ. माधव और उनकी टीम ने तय किया कि वे पारंपरिक सर्जरी के बजाय ‘एंडोस्कोपिक रिमूवल’ का प्रयास करेंगे। जिसमें मुंह के रास्ते एक लचीली ट्यूब डाली जाती है, जिसके आगे कैमरा और पकड़ने वाले उपकरण लगे होते हैं। एक छोटे बच्चे की संकरी भोजन नली और आंतों में इस प्रक्रिया को अंजाम देना सुई में धागा पिरोने जैसा चुनौतीपूर्ण था,डॉ. माधव ने बताया कि अत्यंत कुशलता और धैर्य के साथ उनकी टीम ने एंडोस्कोप की मदद से कील को पकड़ा और धीरे-धीरे उसे बिना किसी आंतरिक चोट के बाहर निकाल लिया। प्रक्रिया सफल रही और बच्चा कुछ ही घंटों में दर्द से मुक्त हो गया। ओर कुछ ही घंटों के अंदर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल वर्मा
