भुवनेश्वर, 06 फ़रवरी (हि.स.)। शहरी गरीबों और कार्यरत वर्ग के लिए किफायती आवास के अवसर बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ओडिशा सरकार ने शहरी क्षेत्रों में स्थित केंद्र एवं राज्य सरकार के खाली और अनुपयोगी भवनों/आवासों की पहचान की प्रक्रिया शुरू की है। इन भवनों को प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी 2.0 (पीएमएवाई-यू 2.0) के तहत किफायती किराया आवास के रूप में विकसित किया जाएगा।

आवास एवं शहरी विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव उषा पाढी ने राज्य सरकार के प्रमुख विभागों को पत्र जारी कर उनके प्रशासनिक नियंत्रण में मौजूद खाली या अनुपयोगी भवनों/आवासों की पहचान कर उनका विवरण ओडिशा शहरी आवास मिशन को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। ओडिशा शहरी आवास मिशन पीएमएवाई-यू 2.0 के क्रियान्वयन के लिए राज्य की नोडल एजेंसी है।
शहरीकरण में आवास एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसका सीधा प्रभाव परिवारों के स्वास्थ्य, कल्याण, स्थिरता, शिक्षा और आर्थिक अवसरों पर पड़ता है। पूर्व की आवास नीतियाँ मुख्य रूप से गृह स्वामित्व को बढ़ावा देने पर केंद्रित थीं, जबकि पीएमएवाई-यू 2.0 में किफायती किराया आवास को एक अलग घटक के रूप में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य शहरी प्रवासियों, औद्योगिक एवं असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों तथा कार्यरत महिलाओं की आवासीय आवश्यकताओं को पूरा करना है, जो तत्काल रूप से घर खरीदने में सक्षम नहीं होते।
पीएमएवाई-यू 2.0 के संचालन दिशा-निर्देशों के अनुसार, किफायती किराया आवास का क्रियान्वयन दो मॉडलों के माध्यम से किया जाएगा। मॉडल-1 के तहत सरकारी वित्तपोषित खाली भवनों/आवासों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी अथवा सार्वजनिक एजेंसियों के माध्यम से किराया आवास में परिवर्तित किया जा सकेगा। मॉडल-2 के अंतर्गत निजी अथवा सार्वजनिक संस्थाएं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए किराया आवास इकाइयों का निर्माण, संचालन और रखरखाव कर सकेंगी तथा दीर्घकालिक किराया आय के माध्यम से निवेश की भरपाई करेंगी।
योजना के प्रावधानों के अनुसार, प्रारंभिक किराया स्थानीय निकाय द्वारा स्थानीय सर्वेक्षण के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। किराये में प्रत्येक दो वर्ष में अधिकतम आठ प्रतिशत की वृद्धि की अनुमति होगी, जो पांच वर्षों की अवधि में कुल मिलाकर अधिकतम बीस प्रतिशत तक सीमित रहेगी, जिससे किफायत और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
यह पहल अनुपयोगी सार्वजनिक परिसंपत्तियों को दीर्घकालिक किराया-आधारित आवास इकाइयों में परिवर्तित करने के साथ-साथ शहरी कार्यबल की स्थिरता, स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और अनौपचारिक बस्तियों के विस्तार को रोकने में सहायक सिद्ध होगी।
संबंधित विभागों से ओडिशा शहरी आवास मिशन को ऐसे खाली भवनों/आवासों का विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि आवश्यक मरम्मत, पुनरुद्धार और उन्हें रहने योग्य बनाने की प्रक्रिया शुरू की जा सके। इसके लिए भारत सरकार के आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सहयोग से पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता महंतो
