पश्चिम मेदिनीपुर, 30 मार्च (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में चुनावी आचार संहिता लागू होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर लगातार हो रहे तबादलों को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को नारायणगढ़ की चुनावी सभा से तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भाजपा और चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रशासन में इस तरह की “भागीदारी और विभाजन” पहले कभी नहीं देखा गया।

सभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य के कई अनुभवी अधिकारियों को हटाया जा रहा है और प्रशासन को विभाजित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह देखा जा रहा है कि कौन अधिकारी आरएसएस या भाजपा से जुड़ा है। उनके अनुसार, इस तरह के कदमों का उल्टा असर पड़ेगा और जनता इसका जवाब वोट के माध्यम से देगी।
मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सुनियोजित साजिश के तहत आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि इससे चुनाव परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
हाल ही में कोलकाता में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ पेश किए गए चार्जशीट पर भी ममता बनर्जी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ चार्जशीट निकलनी चाहिए।
सभा में उन्होंने राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि “युवासाथी”, “कन्याश्री”, “रूपश्री” और अन्य योजनाएं किसी प्रकार की भिक्षा या भत्ता नहीं हैं, बल्कि लोगों को सम्मान के साथ जीवन जीने में मदद करने के लिए शुरू की गई हैं।
इस दौरान ममता बनर्जी ने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि टिकट नहीं मिलने पर असंतोष या पार्टी विरोधी गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। जो नेता जनता के साथ जुड़े रहेंगे, वही भविष्य में टिकट पाने के योग्य होंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता
