कला, संस्कृति और परंपरा का संगम बनकर उभर रहा शिल्प महोत्सव

फरीदाबाद, 11 फरवरी (हि.स.)। 39 वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव-2026 मेले में उमड़े देश-विदेश के पर्यटक यहां की बहुसांस्कृतिक विरासत और जीवंत माहौल का भरपूर आनंद उठा रहे हैं। मेले में आए लोगों के चेहरे पर उत्साह, जिज्ञासा और खुशी साफ झलक दिखाई दे रही है, जिसे कैंडिड फोटोग्राफ्स के माध्यम से खूबसूरती से कैद किया गया है। आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव में विभिन्न राज्यों एवं देशों की पारंपरिक कलाएं, हस्तशिल्प, लोक संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन रही हैं। कहीं मिट्टी, लकड़ी, धातु और कपड़े से बनी कलाकृतियां लोगों को लुभा रही हैं तो कहीं कलाकार अपनी जीवंत प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह रहे हैं। 15 फरवरी तक चलने वाले इस मेले में बुधवार को परिवारों, बच्चों, युवाओं और विदेशी सैलानियों ने स्टॉल-दर-स्टॉल घूमकर अलग-अलग संस्कृतियों को करीब से देखा और समझा। आगंतुकों ने न केवल खरीदारी की, बल्कि कलाकारों से बातचीत कर उनकी कला, परंपरा और मेहनत को भी जाना। सूरजकुंड मेला कला, संस्कृति और परंपरा का ऐसा संगम बनकर उभरा है, जहां विविधता में एकता की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। मेले का यह रंगीन और उल्लासपूर्ण वातावरण आगंतुकों के लिए यादगार अनुभव बन रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / -मनोज तोमर
