मीरजापुर, 11 मार्च (हि.स.)। राजगढ़ विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय पुरैनिया में सोमवार को मनाया गया फल दिवस इन दिनों चर्चा का विषय बन गया है। कारण यह रहा कि बच्चों को मौसमी फलों की जगह ‘बेर’ का स्वाद चखाया गया। मामला सोशल मीडिया तक पहुंचा तो बुधवार को खंड शिक्षा अधिकारी को खुद स्कूल पहुंचकर जांच करनी पड़ी।

दरअसल सरकार की ओर से प्राथमिक व जूनियर हाईस्कूल के बच्चों के लिए मिडडे मील के साथ फल और दूध देने का बाकायदा मीनू तय है। सोमवार को ‘फल दिवस’ पर बच्चों को मौसमी फल देने का निर्देश है। लेकिन पुरैनिया प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के हाथ में केले या सेब की जगह बेर दिखाई दिए। यह दृश्य देखकर ग्राम प्रधान रामलाल और कुछ अभिभावकों का पारा चढ़ गया। किसी ने मोबाइल कैमरा चला दिया और देखते ही देखते वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। फिर क्या था, शिकायत सीधे अधिकारियों तक पहुंच गई और मामला सुर्खियों में आ गया।
बुधवार को खंड शिक्षा अधिकारी संजय यादव विद्यालय पहुंचे और ग्राम प्रधान व ग्रामीणों की मौजूदगी में पूरे प्रकरण की पड़ताल की। जांच में यह बात सामने आई कि प्रधानाध्यापिका अपने घर से कुछ बेर लेकर आई थीं और बच्चों को खाने के लिए दे दिया था। वही बेर बच्चे विद्यालय परिसर में दिखा रहे थे, जिसे देखकर लोगों को लगा कि फल दिवस पर यही फल बांटा गया है।
हालांकि जांच में यह भी सामने आया कि सोमवार को फल वितरण के नाम पर कोई अन्य फल नहीं दिया गया था। अगले दिन यानी मंगलवार को बच्चों को केला वितरित किया गया। पूरे मामले में प्रधानाध्यापिका ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए लिखित रूप से भविष्य में ऐसी गलती न करने की बात कही। इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी ने उन्हें कड़ी चेतावनी देते हुए ‘क्षमादान’ दे दिया।
हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा
