प्रयागराज, 07 फ़रवरी (हि.स.)। फसलों की अच्छी वृद्धि, विकास एवं अच्छे उत्पादन के लिए एकीकृत फसल प्रबन्धन अति आवश्यक है। जिसके माध्यम से एक उद्यम का बचा हुआ अवशेष अगले उद्यम के लिए संसाधन बन जाता है। यह बात शनिवार को कृषि विभाग द्वारा योजित 5 दिवसीय विराट किसान मेले के तृतीय दिवस के आयोजन में कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए बतौर मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश लखनऊ रहमानखेड़ा कृषि निदेशक राजेन्द्र कुमार सिंह ने कही।

उन्होंने कहा कि खेती में पशुपालन, बकरी पालन, भेड़ पालन आदि को शामिल करने से एक तरफ किसान की आय में वृद्धि होती है वहीं दूसरी तरफ उनका अपशिष्ट खाद के रूप में उपयोग में लाया जाता है। जो रासायनिक उर्वरकों की निर्भरता को कम करता है एवं खाद्यान्न की गुणवत्ता को सुधारता है। कृषकों को गन्ने की खेती के साथ उर्द-मूंग की समेकित खेती से गन्ने एवं सहयोगी फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। सिंचाई की लागत को कम करने एवं समुचित जल प्रबन्धन के लिए स्प्रिंगकलर सिंचाई का उपयोग करने से फसलोत्पादन में वृद्धि होती है। विभाग द्वारा ऑनलाईन पोर्टल के माध्यम से टोकन विधि से कृषकों को अनुदानित कृषि यंत्रों का वितरण किया जाता है। फसल चक्र परिवर्तन एवं हरी खाद का उपयोग करने से मृदा में पोषक तत्व की कमी को पूरा किया जा सकता है। समय से फसलों की बुवाई, सिंचाई एवं पोषक तत्वों की कमी की पूर्ति करने के लिए उर्वरकों का प्रयोग एवं समुचित मशीनरी के उपयोग से उत्पादकता में वृद्धि प्राप्त की जा सकती है।
–मोटे अनाजों के प्रयोग से मिलेगा पोषक तत्व प्रयागराज नैनी स्थित शुआट्स कृषि वैज्ञानिक डा. निमिषा नटराजन ने मोटे अनाज और पोषण के बारे में चर्चा करते हुए कृषकों को अवगत कराया कि मोटे अनाजों के प्रयोग से शरीर में होने वाली पोषक तत्वों की कमी को पूर्ण किया जा सकता है। मोटे अनाज प्रोटीन, कार्बोहाईड्रेड, वसा, पोषक तत्व, विटामिन से भरपूर होते हैं। इनके सेवन से शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता में वृद्धि होती है तथा शरीर स्वस्थ रहता है।
–पशुपालन को कृषि में अपनाने से आय में वृद्धि कौशाम्बी कृषि विज्ञान केन्द्र के कृषि वैज्ञानिक डा. आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि पशुपालन को कृषि में अपनाने से कृषकों की आय में वृद्धि होती है, अपशिष्टों को फसलों में कार्बनिक रासायन के तौर पर मिट्टी में उपयोग करने से जीवांशों की संख्या में वृद्धि होती है जिससे मृदा उर्वरता में वृद्धि होती है। देशी नस्ल के गौवंश के दूध की गुणवत्ता विदेशी नस्ल की गायों की अपेक्षा अधिक होती है।
कृषि निदेशक रहमानखेड़ा की अध्यक्षता में 5 दिवसीय विराट किसान मेला, माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर-3 में स्थित गंगा पंडाल, प्रयागराज में आयोजन किया गया। जिसमें कृषि विभाग के अन्तर्गत खाद, बीज, कृषि रक्षा रसायन, सोलर पम्प, ड्रोन एवं विभिन्न प्रकार के कृषि यंत्रों का प्रदर्शन किया गया, डेयरी विभाग, उद्यान विभाग एवं विभिन्न कृषक उत्पादक संगठनों द्वारा 40 से अधिक मेले में स्टाल लगाये गये जिसका मुख्य अतिथियो द्वारा अवलोकन किया गया।
कार्यक्रम के तीसरे दिन मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश लखनऊ रहमान खेड़ा कृषि निदेशक राजेन्द्र कुमार सिंह ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम का संचालन प्रीती त्रिपाठी ने किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल
