रांची,10 फ़रवरी (हि.स.)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक देश को पूर्णतः फाइलेरिया मुक्त बनाना है। जिसके लिए सभी जनप्रतिनिधियों मंत्री,सांसद एवं विधायक इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाते हुए लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाएं। फाइलेरिया मुक्त अभियान को जन-जन तक फैलाएं। ताकि देशभर से फाइलेरिया का पूरी तरह से खात्मा हो सके।

केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देश के सभी राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए बोल रहे थे। इसके साथ ही फाइलेरिया के रोकथाम एवं नियंत्रण को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।

श्री नड्डा ने बताया कि सरकार द्वारा निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं, इसलिए जनता से अपील है कि वे अभियान में शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करें।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आश्वस्त किया कि झारखंड सरकार इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से झारखंड के लिए विशेष ध्यान एवं अतिरिक्त वित्तीय सहायता का भी आग्रह किया,ताकि राष्ट्रीय कार्यक्रमों को राज्य में प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। फिलहाल ग्रामीण क्षेत्रों में सहिया कार्यकर्ताओं के माध्यम से प्रचार-प्रसार एवं दीवार लेखन के जरिए जागरूकता बढ़ाई जा रही है।
मंत्री अंसारी ने राज्य की प्रगति से केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि पूर्व में नौ जिलों में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को 100 प्रतिशत सफलता के साथ संचालित किया गया है, जहां व्यापक जागरूकता अभियान, दवा वितरण तथा मच्छर नियंत्रण के उपाय किए गए। सभी सिविल सर्जनों को जन-जागरूकता एवं रोकथाम के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
अंसारी ने बताया कि वर्तमान में 14 जिलों बोकारो, देवघर, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, गढ़वा, गिरिडीह, गुमला, कोडरमा, लोहरदगा, पाकुड़, रामगढ़, रांची, साहिबगंज एवं सिमडेगा में अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें लगभग 1.75 करोड़ लक्षित आबादी को फाइलेरिया निरोधी दवा दी जा रही है।
उन्होंने जनता से अपील की कि छोटे बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को छोड़कर सभी लोग निःसंकोच दवा का सेवन करें। रांची एवं खूंटी जिलों में शत-प्रतिशत दवा सेवन का उदाहरण सराहनीय रहा है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए राज्य स्तर पर टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिसमें 22 विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देश दिया है कि कम से कम 95 प्रतिशत लक्षित आबादी को दवा सेवन सुनिश्चित किया जाए। जिन क्षेत्रों में दवा सेवन कम है या विरोध अधिक है, वहां विशेष रणनीति के तहत निगरानी बढ़ाई गई है। दवा वितरण कर्मियों एवं पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है तथा 14 जिलों के 87 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों का उन्मुखीकरण किया जा चुका है।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar
