मुंबई, 25 फरवरी (हि.स.)। महाराष्ट्र सरकार पर ठेकेदारों का 77 हजार करोड़ रुपये का बकाया है. इसे लेकर सरकार और ठेकेदारों के बीच टकराव बढ़ गया है. ठेकेदारों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। आंदोलन की दिशा तय तय करने के लिए 9 मार्च को बैठक बुलाई गई है। ठेकेदारों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके बकाए पैसों का भुगतान नहीं किया गया तो वे सरकारी काम बंद कर देंगे।

सरकारी ठेकेदारों ने आंदोलन शुरू कर दिया तो कई विकास परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। राज्य सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी। हालांकि सरकार ने भरोसा दिलाया है कि ठेकेदारों के बकाए का भुगतान जल्द किया जाएगा। बजट सत्र चल रहा है। इस बीच ‘स्टेट कॉन्ट्रैक्टर्स फेडरेशन’ ने आरोप लगाया है कि सरकारी ठेकेदारों का 78 हजार करोड़ रुपये अभी भी बकाया है। ट्रेजरी में पैसे की कमी के कारण सरकार द्वारा जारी किए गए चेक भी नहीं दिए जा रहे हैं। पिछले साल तक ठेकेदारों का कुल बकाया करीब 89 हजार करोड़ रुपये था। काम का पेमेंट न मिलने पर एक ठेकेदार ने आत्महत्या भी कर ली थी। इसके बाद सरकार कुछ राशि देने पर मान गई थी। लेकिन साल भर में केवल 10 प्रतिशत रकम ही दी गई है। बाकी बचे बकाए के लिए ठेकेदार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं।

फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष मिलिंद भोसले के अनुसार कुछ विभागों ने ठेकेदारों को बकाया काम के चेक दिए हैं। लेकिन जब ये चेक बैंक या ट्रेजरी में ले जाते हैं, तो उन्हें बताया जाता है कि वहां पैसा नहीं है। यह ठेकेदारों के साथ क्रूर मजाक है. उन्होंने बताया कि फंड की कमी से न केवल पुराने भुगतान में देरी हुई है, बल्कि चल रहे विकास कार्यों पर भी असर पड़ रहा है। नए कामों को मंजूरी मिलने की दर कम है। इस नाइंसाफी के खिलाफ आवाज उठाने के लिए 9 मार्च को राज्य के सरकारी इंजीनियरों और ठेकेदारो की एक अहम बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में आगे के आंदोलन की दिशा तय की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार
