बड़वानी, 02 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में नर्मदा बचाओ आंदोलन के तहत नर्मदा घाटी के विस्थापित मछुआरों ने सोमवार को अपने संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की मांग को लेकर नर्मदा नदी में विशाल नाव रैली निकाली। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर के नेतृत्व में यह रैली कसरावद से राजघाट तक आयोजित की गई, जिसमें 30 से अधिक नावों पर सवार सैकड़ों मछुआरा परिवार शामिल हुए।

नाव रैली के माध्यम से मछुआरों ने सरकार और प्रशासन का ध्यान वर्षों से लंबित मांगों की ओर आकर्षित किया। रैली के समापन के बाद मछुआरा संगठनों द्वारा कलेक्टर बड़वानी को 10 सूत्रीय मांगों का विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया।

नर्मदा घाटी के मछुआरे सबसे बड़े विस्थापन पीड़ित
इस मौके पर मेधा पाटकर ने कहा कि नर्मदा घाटी के मछुआरे विस्थापन के सबसे बड़े पीड़ित हैं, लेकिन दशकों बाद भी उन्हें उनके कानूनी अधिकार नहीं मिल पाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक व तेज किया जाएगा।
ट्रिब्यूनल के फैसले का पालन करने की मांग
आंदोलनकारियों ने नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सरदार सरोवर अंतरराज्यीय परियोजना से जुड़े लाभ, हानि और पुनर्वास से संबंधित सभी विषयों पर उसी के अनुसार कार्रवाई अनिवार्य है। यह फैसला 18 अक्टूबर 2000 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के तहत कानूनन मान्य है।
नर्मदा ट्रिब्यूनल की धारा XI, उपधारा V(8) के अनुसार सरदार सरोवर जलाशय में मत्स्य पालन का अधिकार राज्य शासन के पास है। इस संबंध में केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मत्स्य विभाग द्वारा पूर्व में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात के मुख्य सचिवों को पत्र भी लिखा जा चुका है, बावजूद इसके मछुआरों को अब तक उनके अधिकार नहीं मिले हैं।
प्रदूषण, अवैध खनन और क्रूज संचालन पर चिंता
आंदोलनकारियों ने जलाशय में बढ़ते प्रदूषण, अवैध रेत खनन, क्रूज संचालन और जलस्तर में लगातार गिरावट से मत्स्याखेट पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों पर गंभीर चिंता जताई। साथ ही पुलिस-प्रशासन द्वारा कथित उत्पीड़न के मामलों में त्वरित कार्रवाई की मांग भी की गई। इस नाव रैली और जल भरो आंदोलन में बड़वानी, धार, खरगोन और अलीराजपुर जिलों के बड़ी संख्या में मछुआरा परिवार शामिल हुए।
मछुआरों की 10 प्रमुख मांगें
सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित मछुआरों को नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले अनुसार पूर्ण अधिकार दिए जाएं।
नर्मदा माता मत्स्य सहकारी उत्पादन एवं विपणन संघ का शीघ्र पंजीकरण किया जाए।
विस्थापित मछुआरों को संपूर्ण पुनर्वास लाभ प्रदान किया जाए।
प्रभावित परिवारों को आवास सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
मछुआरों की आजीविका की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
सरदार सरोवर जलाशय में मत्स्य व्यवसाय सहकारी समितियों को सौंपा जाए।
मत्स्याखेट में ठेकेदारी प्रथा समाप्त की जाए।
मछुआरों को किसान का दर्जा दिया जाए।
मछुआरों को केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) की सुविधा दी जाए।
मत्स्याखेट की बंद अवधि में आर्थिक सहायता राशि बढ़ाई जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे
