बलरामपुर, 09 फ़रवरी (हि.स.)। जिले के राजपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम खोडरो की निवासी ज्योति सिंह ने सिद्ध कर दिखाया है कि यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी बदला जा सकता है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर उन्होंने अपने परिवार को आर्थिक तंगी से बाहर निकाला है साथ ही महिला सशक्तिकरण की मिसाल भी कायम की है।

कुछ वर्ष पूर्व तक ज्योति सिंह का जीवन कृषि कार्य और मजदूरी पर निर्भर था। परिवार की कुल वार्षिक आय मात्र 40 हजार रुपये थी, जिससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों की पूर्ति करना अत्यंत कठिन था। सीमित संसाधनों के कारण भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती थी। ज्योति सिंह के जीवन में नया मोड़ तब आया, जब वे राजमोहनी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। मिशन के अंतर्गत समूह में 20 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश निधि तथा 30 हजार रुपये का बैंक ऋण प्राप्त हुआ। इस वित्तीय सहयोग ने ज्योति के जीवन में स्वरोजगार की राह प्रशस्त की।
प्राप्त पूंजी का सदुपयोग करते हुए ज्योति सिंह ने परंपरागत खेती के साथ-साथ कपड़ा एवं सिलाई की दुकान की शुरुआत की। उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाकर उन्होंने अपनी कृषि आय को 30 हजार से बढ़ाकर 60 हजार रुपये किया। साथ ही कपड़ा एवं सिलाई व्यवसाय से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 70 हजार रुपये की अतिरिक्त आय होने लगी। ज्योति के मेहनत और लगन, प्रयासों के परिणामस्वरूप जहाँ पहले परिवार की वार्षिक आय केवल हजारो रुपए तक सीमित थी वहीं आज आय बढ़कर लगभग एक लाख 30 हजार रुपये तक पहुँच चुकी है। लखपति दीदी बन वर्तमान में ज्योति सिंह आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। वे इस आय से अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करा रही हैं, परिवार पर समुचित खर्च कर पा रही हैं तथा सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
ज्योति सिंह अपने गाँव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। वे महिलाओं को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ने और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित भी कर रही हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय
