बलरामपुर, 26 फ़रवरी (हि.स.)।पशुपालकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयाँ उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिले में “पशु औषधि विक्रय केंद्र” स्थापित किए जाएंगे। केंद्र एवं राज्य सरकार के निर्देशानुसार यह केंद्र सहकारी समितियों के माध्यम से संचालित होंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाया जा सके।

जारी विज्ञप्ति के अनुसार, योजना के तहत पात्र प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केन्द्र एवं सहकारी समितियां अपने क्षेत्र में पशु औषधि विक्रय केंद्र स्थापित कर सकेंगी। इसके लिए न्यूनतम 120 वर्गफुट स्थान (स्वयं का या किराए का) होना अनिवार्य है। साथ ही केंद्र संचालन हेतु बी-फार्मा या डी-फार्मा डिग्रीधारी की नियुक्ति तथा राज्य औषधि नियंत्रण प्राधिकरण से औषधि विक्रय लाइसेंस प्राप्त करना आवश्यक होगा।

स्वीकृत आवेदकों के लिए आवेदन शुल्क 5,000 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि आकांक्षी जिलों एवं विकासखंडों के लिए शुल्क में छूट प्रदान की गई है। प्रत्येक विकासखंड में केवल एक पशु औषधि विक्रय केंद्र स्थापित किया जाएगा। प्रदेश स्तर पर चयनित प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र एवं सहकारी समितियों को क्षेत्र में संचालित पशु चिकित्सालय भवन या परिसर में अनुबंध के आधार पर स्थल प्रबंधन की सुविधा भी दी जा सकेगी।
यह योजना फार्मास्यूटिकल्स विभाग, सहकारिता मंत्रालय तथा भारतीय फार्मास्यूटिकल्स एवं चिकित्सा उपकरण ब्यूरो के सहयोग से संचालित की जा रही है।
पशु औषधि विक्रय केंद्र की स्थापना हेतु आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। इच्छुक आवेदक विभागीय वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया से संबंधित प्रदर्शन एवं शैक्षणिक वीडियो प्रतिदिन दोपहर 3:00 से 4:00 बजे के बीच वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगा।
इस पहल से पशुपालकों को बाजार दर से कम कीमत पर दवाइयाँ मिल सकेंगी, जिससे पशुधन के बेहतर उपचार के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय
