मुंबई, 02 फ़रवरी (हि.स.)। मुंबई. मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की 227 सदस्यीय आम सभा में भाजपा–शिवसेना (महायुति) ने 118 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है, लेकिन इसके बावजूद वह मुंबई की 18 वार्ड समितियों में से आधे से भी कम पर नियंत्रण रख पाएगी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 18 में से 9 वार्ड समितियों की अध्यक्षता विपक्षी दलों के पास जाने की संभावना है। इनमें शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), कांग्रेस और AIMIM शामिल हैं। वहीं 8 वार्ड समितियों पर भाजपा के अध्यक्ष बनने की उम्मीद है, जबकि 1 समिति में बराबरी (टाई) की स्थिति बन सकती है।

गठबंधन का वर्चस्व बना रहने की उम्मीद
शहर के कई प्रमुख इलाके जैसे वर्ली–प्रभादेवी, लोअर परेल, दादर, माहिम, बांद्रा पूर्व–पश्चिम, कोलाबा–भायखला, जोगेश्वरी, मलाड पूर्व–पश्चिम और कुर्ला विपक्ष के पास जाने की संभावना है। इन इलाकों में विपक्षी दलों के निर्वाचित प्रतिनिधियों की संख्या अधिक है।
वहीं महायुति ने अपने मजबूत गढ़ों में पकड़ बनाए रखी है। मालाबार हिल, अंधेरी, गोरेगांव, कांदिवली, बोरीवली, दहिसर और घाटकोपर जैसे क्षेत्रों में भाजपा–शिवसेना गठबंधन का वर्चस्व बना रहने की उम्मीद है। गोवंडी वार्ड समिति की अध्यक्षता एआईएमआईएम को मिल सकती है।
वार्ड समितियों को ₹5 लाख तक के कार्यों को मंजूरी का अधिकार
वार्ड समितियां नगर प्रशासन की अहम इकाई हैं। ये स्थायी समिति की तरह वार्ड स्तर पर काम करती हैं और स्थानीय नागरिक समस्याओं पर सीधा ध्यान देती हैं। इनमें सफाई, कचरा प्रबंधन, पानी की आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट और छोटे इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य शामिल हैं। वार्ड समितियों को ₹5 लाख तक के कार्यों को मंजूरी देने का अधिकार होता है।
माटुंगा निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता निखिल देसाई का कहना है कि यदि वार्ड समिति के अध्यक्ष विपक्ष से हों, तो विकास कार्यों में पक्षपात कम होता है और पूरे वार्ड में समान विकास की संभावना बढ़ती है। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि नागरिक प्रतिनिधियों की सीटें वास्तव में आम नागरिकों को मिलें, न कि चुनाव हार चुके नेताओं को।
यह स्थिति दिखाती है कि संख्या बल के बावजूद, स्थानीय सत्ता संतुलन में विपक्ष की भूमिका मजबूत बनी रहेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / ROHIT TIWARI
