– डॉ. रमेश ठाकुर

पड़ोसी देश बांग्लादेश में तारिक रहमान की अगुवाई में नई सरकार शपथ ले चुकी है। खास बात ये है नयी सरकार में दो हिंदू सांसदों को मंत्री बनाया गया है। समूची दुनिया इस निर्णय को भारत के साथ प्रत्यक्ष रूप से बांग्लादेश के बिगड़े संबंधों को सुधारने की पहल के रूप में देख रही है। इस कदम से चीन-पाकिस्तान चिढ़े भी हैं। यह उनके लिए असहज स्थिति पैदा करता है कि बांग्लादेश, भारत या उसके नजदीकियों को तवज्जो दे। लेकिन, देश के नये प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने ऐसे मंसूबों को धता बताते हुए बड़ी सूझबूझ से कदम आगे बढ़ाया। बीते कुछ महीनों में 11 हिंदुओं की बर्बरता के साथ हुई हत्या ने बांग्लादेश की न सिर्फ थू-थू करवाई बल्कि दशकों से चले आ रहे भारत के साथ उसके मधुर संबंधों को भी पटरी से उतार दिया। इसे लेकर दोनों देशों में तल्खियां बनी हुई थीं। रहमान जानते हैं अगर माहौल ऐसा ही रहा तो रिश्तों की दूरियां घटने वाली नहीं। इसपर गौर करते हुए रहमान ने अपनी कैबिनेट में हिंदू समुदाय से ताल्लुक रखने वाले सांसदों को अहम औहदे सौंपे ताकि रिश्तों में फिर से नरमी लाई जा सके।

शेख हसीना की सरकार के पतन के साथ ही देश के हिंदु समुदाय को जिस तरह निशाना बनाया गया और बड़ी संख्या में भीड़ की हिंसा की घटनाएं तेजी से बढ़ीं, तारिक रहमान के सामने इन घटनाओं को तत्काल रोकने की बड़ी चुनौती है। हालांकि, इन घटनाओं को रोकने के लिए वह अपने कदम तेजी से बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री रहमान सबसे पहले पूर्व की अंतरिम सरकार के मुखिया रहे मोहम्मद यूनुस के फैसलों की गहन समीक्षा करेंगे। मोहम्मद यूनुस का झुकाव भारत को परेशान करने वाली पाकिस्तान-चीन की संयुक्त खुराफाती नीतियों की ओर ज्यादा रहा था। रहमान अच्छी तरह से समझते हैं कि जबतक मोहम्मद यूनुस कार्यकारी प्रधानमंत्री रहे, उन्होंने भारत के साथ संबंधों को बिगाड़ने की हरसंभव कोशिशे की। कुछ उन्होंने की और कुछ दूसरे देशों ने करवाई।
तारिक रहमान अपनी कैबिनेट में अल्पसंख्यक हिंदू मंत्रियों की आमद के साथ बांग्लादेश में अगले पांच सालों तक स्थिर और प्रभावशाली सरकार चलाने की मंशा रखते हैं। इसी को ध्यान में रखकर जब उनकी पार्टी बीएनपी चुनावों में जीती तो सबसे पहले वह अपने धुर विरोधी विपक्षी नेता और जमात-ए-इस्लामी प्रमुख शफीकुर रहमान के बिना बुलाए ढलती शाम के बाद उनके आवास पहुंच गए। चुनावी गुस्सेबाजियों के इतर उनसे नई सरकार में सहयोग की गुजारिश की। विपक्षी नेता ने भी राजनीतिक दुश्मनी छोड़ कर अपने घर पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
इस तरह की राजनीतिक परंपरा का प्रचार-प्रसार पूरे विश्व में होना चाहिए कि चुनाव बाद विपक्ष से सत्ता पक्ष को कैसे व्यवहार करना चाहिए। ये उन देशों के लिए सीख भी है जहां पक्ष-विपक्ष आपस में अनैतिकता की सभी सीमाएं लांघ रहे हैं। रहमान उस विपक्षी नेता के घर भी पहुंचे जिनकी पार्टी चुनाव में तीसरे स्थान पर रही। नेशनल सिटीजन पार्टी के नाहिद इस्लाम को भी गले लगाया और बांग्लादेश के विकास में उनसे भी सहयोग मांगा। राजनीति में ऐसी तस्वीरों का दिखना दुर्लभ होता है लेकिन बांग्लादेश में दिखी।
रहमान की जीत पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का उन्हें भाई बताना और उनकी जीत की खुशी में फूल-मिठाइयां को ढाका भेजना भी खतरे में पड़े संबंधों में रस भरने जैसा कहा जाएगा। साथ ही रहमान के शपथग्रहण समारोह में भारत सरकार की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का पहुंचना भी संबंधों को नए सिरे से गढ़ने जैसा है। भारत के खिलाफ अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए जिस तरह चीन-पाकिस्तान ने बांग्लादेश के कंधों का इस्तेमाल कर देश को सत्यानाश के रास्ते पर धकेल दिया, उसका अंदाजा नवगठित सरकार के मुखिया को है। बांग्लादेश-भारत संबंध जितने बिगड़ेंगे, दोनों देश मिलकर उतना ही फायदा उठाएंगे। चीन-पाकिस्तान की जुगलबंदी ने पूर्व की कार्यकारी सरकार को कठपुतली की तरह इस्तेमाल किया। पाकिस्तान की शह पर बंगाली और हिंदुओं को खूब लड़ाया गया लेकिन 13वें राष्ट्रीय चुनाव में हिंदू समुदाय के तीन सांसद जीते हैं- जिनमें निताई राॅय चौधरी को स्पीकर, चटगांव से जीते अधिवक्ता दीपेन दीवान को पहाड़ी क्षेत्रों के संरक्षण के लिए मंत्री और गोयेश्वर राॅय चौधरी को रेलमंत्री बनाया गया है। यह तथ्य एक उम्मीद जगाते हैं।
बांग्लादेश में नई सरकार के गठन के साथ करीब एक-डेढ़ साल से देश के विभिन्न हिस्सों में हिन्दुओं के खिलाफ भीड़ की हिंसा का जो दौर चल रहा था, वो फिलहाल थमता दिख रहा है। देश की जनता को इस दिन का लंबे समय से इंतजार था। काफी जद्दोजहद और राजनीतिक अस्थिरता के बीच हुए आम चुनाव में बीएनपी ने बड़े अंतर से विजय हासिल की है। कुल 298 संसदीय सीटों में 297 पर चुनाव हुए, उनमें से रिकॉर्ड 209 सीटें बीएनपी ने जीतीं। दूसरे नंबर पर जमात-ए-इस्लामी रही जिसने 68 सीटें जीतीं। तारिक रहमान की नई कैबिनेट में डॉ. खलीलुर रहमान को विदेश मंत्री, सलाहुद्दीन अहमद को गृह मंत्री, डाॅ. अमीर खसरू महमूद को वित्त एवं प्लानिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कुल मिलाकर तारिक रहमान ने शिक्षित और बुद्धिजीवी लोगों से अपनी कैबिनेट को सजाया है। कैबिनेट में कुल 50 मंत्री हैं, जिनमें 25 कैबिनेट और 24 राज्यमंत्री हैं।
(लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश
