आसनसोल, 09 फ़रवरी (हि. स.)। बराबनी विधानसभा के गोरंडी स्थित कासकूली में चल रहे अवैध पत्थर खदान और उस खदान में किये जा रहे हैवी ब्लास्टिंग व इलाके में चल रहे अवैध क्रेसर का धंधा थमने का नाम नही ले रहा। कुछ दिनों पहले ही एक आदिवासी समाज ने भारत जकात माझी परगना के बैनर तले डीएम को एक लिखित ज्ञापन सौंपा था और उन्होंने इलाके मे चल रही अवैध पत्थर खदान को अविलम्ब बंद करवाने की मांग की थी। यह सूचित करते हुए की इलाके में चल रही अवैध पत्थर खदान के कारण इलाके में प्रदूषण तो फ़ैल ही रहा है, साथ में पत्थर खदान मे पत्थर तोड़ने के लिये तेज धमाके हुए भी किए जा रहे है।

इसके अलावा पत्थर खदान के विस्तार के लिये हरे भरे पेड़ों की कटाई भी की जा रही है, जिससे उनका जल, जंगल और जमीन खतरे मे पड़ चुका है। लोगों को सांस लेने में तकलीफें हो रही हैं। ऐसे में आदिवासी समाज द्वारा उनका विरोध करने पर पुलिस और राजनीतिक दलों के द्वारा उनको किसी झूठे केस मे फंसाने की धमकी दी जाती है जिससे तंग आकर अब आदिवासी समाज एक बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे है।
उल्लेखनीय है कि बाराबनी गोरंडी इलाके के कासकूली में चल रही अवैध पत्थर खदान और क्रेसर सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपए की चुना लगाते पुलिस और जिला प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर अवैध रूप से पत्थर खदान और क्रेसर मशीन चला रहे हैं। पत्थर खदान चलाने के लिये राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए नियम के अनुसार पत्थर खदान के लिये लागू करने वाले आवेदक के पास करीब साढ़े सात बीघा जमीन होनी चाहिए। जिसमें करीब पांच से 10 कट्ठा जमीन आवेदक के नाम पर होनी चाहिए। जिससे यह साबित हो सके की वह जिस जगह पत्थर का खदान चलाना चाहता है, वहां का वह रैयति है।
पश्चिम बर्धमान एआईएमआईएम जिलाध्यक्ष दानिश अजीज ने पश्चिम बर्धमान जिलाधिकारी के अलावा सितारामपुर स्थित डिजिएमएस कार्यालय मे जाकर भी ज्ञापन दिया गया है। अवैध पत्थर माफियाओं के ऊपर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।
दानिश का कहना है कि यह सब धंधे राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं के सह पर चल रही है। —————
हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा
