काठमांडू, 27 मार्च (हि.स.)। बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में बनने वाली नई सरकार में कई पुरानी परंपराओं को बदलने की योजना बनाई गई है। इनमें पहली कैबिनेट बैठक से १०० दिन १०० एजेंडा का प्रस्ताव पारित करने की तैयारी है।

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने इस बार संकेत दिया है कि मंत्री शपथ के बाद किए जाने वाले ‘पहले निर्णय’ की परंपरा को जारी नहीं रखा जाएगा। इसके बजाय, कैबिनेट स्तर पर ही 100 दिनों के भीतर लागू करने के लक्ष्य के साथ ‘100 निर्णय’ लेने की तैयारी की जा रही है।
बालेन के करीबी नेता कुमार बेन ने कहा, “मंत्री व्यक्तिगत रूप से पहला निर्णय नहीं लेंगे, बल्कि कैबिनेट ही प्राथमिकताओं के आधार पर 100 फैसले करेगी। इसके बाद संबंधित मंत्रालय अपने अधिकार क्षेत्र में उन निर्णयों को लागू करेंगे—और परिणाम भी वहीं से दिखाई देंगे।”
उनके अनुसार, इस मॉडल का उद्देश्य ‘लोकलुभावन घोषणाओं’ के बजाय परिणाममुखी कार्यों पर जोर देना है। उन्होंने मंत्रियों के काम को अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक नई संरचना पर भी चर्चा करने की जानकारी दी है।
कुमार बेन के अनुसार, प्रत्येक मंत्री की सहायता के लिए चार-चार सांसदों को नियुक्त करने के विषय में आंतरिक स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है। उन्होंने कहा, “मंत्री अकेले सब कुछ संभालेंगे, ऐसा नहीं है। सांसदों की टीम बनाकर काम कराने की तैयारी है। इससे निर्णयों के कार्यान्वयन और निगरानी दोनों में आसानी होगी।”
इससे पहले वनस्थली स्थित केंद्रीय कार्यालय में हुई केंद्रीय समिति और संसदीय दल की संयुक्त बैठक में सभापति लामिछाने ने मंत्री चयन की जिम्मेदारी नेतृत्व पर छोड़ने का आग्रह किया था। उन्होंने यह भी कहा कि “हम विशेषज्ञता के आधार पर मंत्रियों का चयन करेंगे” और आंतरिक लॉबिंग से बचने का निर्देश दिया था।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास
