बीकानेर, 08 फ़रवरी (हि.स.)। महाफलदायी योग में मंगलवार को बीकानेर की ख्यातनाम पुष्करणा जाति के सैकड़ों जोड़े सात फेरे लेकर शादी के बंधन में बंधेंगे। प्रति दो वर्ष के बाद आने वाले पुष्करणा सावा में अब दो दिन शेष रह गए हैं। आज से तीसरे दिन यानि मंगलवार, 10 फरवरी को पुष्करणा समाज के सैकड़ों युवक-युवतियां परिणय सूत्र में बंधेंगे। हर समाज की अपनी-अपनी अलग रस्में, मान प्रतिष्ठाएं देखी जा सकती है। पुष्करणा समाज ने भी बेवजह अनावश्यक खर्चों पर आज भी कोई दिखावटीपन नहीं दिखलाया है। शहर की स्थापना के बाद पुष्करणा समाज के ओलम्पिक विवाह (सामूहिक) का क्रम शुरु हुआ जो आज भी अनवरत् रुप से जारी है।

शहर के जाने-माने समाजसेवी श्रीनारायण आचार्य की मानें तो पहले पुष्करणा सावा 7 वर्षों में एक बार निकाला जाता था। समाज के ही लोगों की मांग पर पहले पांच वर्षों, चार वर्ष और अब हर दो साल बाद पुष्करणा समाज के सामूहिक सावे में सैकड़ों जोड़े परिणय सूत्र में बंधते हैं। शहर में जिन घरों में 10 फरवरी को शादी होनी है उन घरों में आज से ‘रमक झमक’ शुरु होने का क्रम जबरदस्त रुप ले लेगा। समाज की अनेक संस्थाएं पुष्करणा सामूहिक सावा व्यवस्था समिति, रमक झमक सहित अनेक संस्थाएं अपने-अपने स्तर पर बेहतर कार्य करने को अंजाम दे रही हैं। बारहगुवाड़ से नत्थूसर गेट के रास्ते पर रमक झमक संस्था ऐसी है जिसने इस बार फिर अनेक पुरस्कारों की घोषणाएं की है।

संस्था के प्रहलाद ओझा ‘भैरु’ का कहना है कि संस्था का यही और यही सिर्फ एक ही मकसद है कि समाज की पौराणिक परम्पराएं कायम रहे और विष्णुरुपी दूल्हे का गणेवश जारी रहे। समाज में एकता बढ़े, कुरीतियों का खात्मा हो यही उद्देश्य लेकर वे चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने भी अपने पुत्र राधे ओझा की शादी भी पुष्करणा ओलम्पिक सावे में ही करना मुनासिब समझा। यही नहीं शहर के जाने-माने समाजसेवी राजेश चूरा भी अपने होनहार सुपुत्र आशीष चूरा, पं. जुगल किशोर ओझा ‘पूजारी बाबा’ के पौत्र की शादी भी ओलम्पिक सावे में हो चुकी है। शहर का भ्रमण देर रात्रि तक भी करेंगे तो रमक झमक नत्थूसर गेट से लेकर बारहगुवाड़ चौक तक ज्यादा देखने को मिलेगी। जिन घरों में पुष्करणा सावा के तहत मंगलवार को शादी होनी है उन घरों में रविवार से ‘हाथ काम’ से कार्यक्रमों की शुरुआत हो गयी।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव
