बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन, शोध-पत्रों का लोकार्पण

झांसी, 24 फ़रवरी (हि.स.)। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में आयोजित ‘बुंदेलखंड के साहित्य, समाज और संस्कृति में राम’ विषयक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का मंगलवार को समापन हो गया।

मुख्य अतिथि छतरपुर के मुख्य विकास अधिकारी श्रीनमःशिवाय अड़जरिया ने इतिहास के अध्ययन में नई दृष्टि अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विभिन्न संदर्भों के माध्यम से बताया कि भगवान श्रीराम का प्रभाव विश्वव्यापी है। रूस में हुए साहित्यिक कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने आयोजकों को बधाई दी।
समापन सत्र में कुलपति प्रो मुकेश पाण्डेय ने कहा कि भगवान श्रीराम का चरित्र और आदर्श सम्पूर्ण मानवता के लिए अनुकरणीय है। उनके संदेशों को आत्मसात कर समाज को नई दिशा दी जा सकती है।
कुलपति ने कहा कि दो दिन तक चले विचार-विमर्श से निश्चित ही नई बौद्धिक ऊर्जा का संचार होगा। उन्होंने अल्पकाल में शोध-पत्रों को पुस्तक रूप में प्रकाशित करने पर आयोजन समिति की सराहना की। साथ ही विश्वविद्यालय को प्राप्त नैक प्लस रैंकिंग और पीएम-उषा मेरू योजना में चयन को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर कराने पर बल दिया।
कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा कि संगोष्ठी में हुए विचार-विमर्श से शिक्षकों व विद्यार्थियों के ज्ञान में वृद्धि होगी। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की प्रधान संपादक डॉ. अमिता द्विवेदी सहित अन्य अतिथियों ने भी विचार रखे। इस अवसर पर शोध-पत्रों से तैयार पुस्तकों का लोकार्पण किया गया।
तकनीकी सत्रों में विभिन्न विद्वानों ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। डॉ. द्युति मालिनी ने बुंदेली गीतों में श्रीराम विषय पर शोध प्रस्तुत किया। डॉ. मुहम्मद नईम ने कोंच की रामलीला पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है। डॉ. राघवेंद्र दीक्षित ने मीडिया में श्रीराम के प्रस्तुतीकरण पर विचार रखे। सत्र में कई विद्वानों को सम्मानित भी किया गया।
संयोजक एवं कला संकाय के अधिष्ठाता डॉ. पुनीत बिसारिया ने संगोष्ठी की गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि हिंदी संस्थान शोध-पत्रों पर विशेषांक प्रकाशित करेगा। संचालन डॉ. श्रीहरि त्रिपाठी ने किया तथा आभार प्रो. मुन्ना तिवारी ने व्यक्त किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया
