धर्मशाला, 08 फ़रवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार आज जिस तथाकथित “व्यवस्था परिवर्तन” का ढोल पीट रही है, उसकी वास्तविक तस्वीर सुलह विधानसभा क्षेत्र की ज़मीन पर खड़ी अधूरी इमारतों, ठप पड़ी योजनाओं और जर्जर ढांचों में साफ़ दिखाई देती है। ये अधूरे भवन केवल प्रशासनिक विफलता नहीं हैं, बल्कि जनता के साथ किया गया खुला और सुनियोजित विश्वासघात हैं। यह आरोप पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक विपिन सिंह परमार ने रविवार को जारी एक प्रेस बयान में लगाया।

उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र सुलह में पंचायत भवनों से लेकर आईटीआई, किसान भवन, अस्पतालों के अतिरिक्त भवन और फार्मेसी कॉलेज जैसी लगभग हर महत्वपूर्ण योजना भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में स्वीकृत हुई, बजटेड हुई और ज़मीन पर उतरी। लेकिन कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही इन योजनाओं को या तो ठंडे बस्ते में डाल दिया या जानबूझकर अधर में लटका दिया।

उन्होंने कहा कि सुलह विधानसभा क्षेत्र में गठित 14 नई पंचायतों को बने पांच वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। पूर्व भाजपा सरकार ने प्रत्येक पंचायत के लिए 33-33 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की थी। कई पंचायतों में निर्माण कार्य शुरू भी हुआ, लेकिन कांग्रेस सरकार की निष्क्रियता के कारण आज भी पंचायतें किराए के कमरों, निजी भवनों या अस्थायी स्थानों से चल रही हैं। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि पंचायती राज व्यवस्था को कमजोर करने का सुनियोजित प्रयास है।
सुलह विधानसभा क्षेत्र में फार्मेसी कॉलेज की स्थापना भाजपा सरकार की दूरदर्शी सोच का परिणाम थी। कॉलेज स्वीकृत हुआ, भवन निर्माण शुरू हुआ और बजट भी तय किया गया। लेकिन आज स्थिति यह है कि फार्मेसी कॉलेज की कक्षाएं किराए के भवन में चलाई जा रही हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है।
इसी तरह रमेहड़ पंचायत में किसान भवन के लिए 1.53 करोड़ रुपये का बजट भाजपा सरकार के समय स्वीकृत हुआ और शिलान्यास भी हुआ। उद्देश्य किसानों को स्थायी मंच देना था। चार साल बीत जाने के बाद भी भवन अधूरा है। आज किसान पूछ रहा है जब पैसा था, योजना थी और काम शुरू हो चुका था, तो कांग्रेस सरकार ने इसे पूरा क्यों नहीं किया? कांग्रेस के पास इसका कोई जवाब नहीं है।
भवारना अस्पताल के लिए 24.30 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। इसी तरह थुरल अस्पताल के लिए 18.42 करोड़ रुपये और धीरा अस्पताल के अतिरिक्त भवन की पूरी योजना और बजट तय हो चुका था। भाजपा सरकार के समय शिलान्यास हुआ, राशि जारी हुई और निर्माण शुरू हुआ, लेकिन कांग्रेस सरकार के राज में ये भवन पिछले सात वर्षों से अधूरे पड़े हैं। मरीजों को अव्यवस्था, भीड़ और संसाधनों की भारी कमी झेलनी पड़ रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया
