चित्तौड़गढ़, 27 जनवरी (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी के चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र के मंडल अध्यक्षों की घोषणा के बाद पार्टी के भीतर कुछ ठीक नहीं चल रहा है। भाजपा के ही एक धड़े ने मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति पर सवाल खड़े करते हुवे ताल ठोक दी है। इन नियुक्तियों के बाद असंतुष्ट भाजपा नेताओं और पदाधिकारियों की गुप्त बैठकों का दौर जारी है। खबर यह भी है कि असंतुष्ट चल रहे एक धड़े ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष से भी चर्चा की है। वहीं प्रदेशाध्यक्ष ने उचित समाधान का आश्वासन दिया है। बताया जाता है कि मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर आगामी 29 जनवरी तक अल्टीमेटम दिया गया है अन्यथा भाजपा की अंदरूनी खींचतान सड़क पर आ सकती है। हालांकि इस संबंध में भाजपा के किसी बड़े नेता की कोई खुल कर प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अंदर खाने जरूर भाजपा नेताओं में चर्चाओं का दौर जारी है।

जानकारी के अनुसार भारतीय जनता पार्टी के चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र के 6 मंडल अध्यक्षों की घोषणा होने के बाद अब भाजपा के अंदरखाने कुछ ठीक नहीं चल रहा है। जानकारी है कि तीन दिन पूर्व भाजपा के एक असंंतुष्ट खेमे ने जो कि कथित रूप से सीपी जोशी समर्थक माना जाता है उन्होंने पार्टी के एक नेता के घर पर गुप्त बैठक की। इसमें बड़ी संख्या में प्रमुख पदाधिकारी, कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सूत्र बताते है कि बैठक के दौरान गोपनीय बात सामने न आए इसकी पूरी सावधानी रखी गई और मौके पर आए सभी लोगों के मोबाइल बंद कर एक थैले में भर दिए गए। इसके बाद खुल कर सियासी चर्चा हुई और मनोनीत मंडल अध्यक्ष पर विरोध जताया गया।

सूत्रों से जानकारी मिली है कि गुप्त बैठक के दौरान धनेत सरपंच रणजीत सिंह को इसका नेतृत्व दिया गया। उन्होंने मौजूद पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के सामने ही प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को फोन लगाया। उनके उदयपुर होने की पुष्टि होने के बाद बड़ी संख्या में सभी लोग प्रदेशाध्यक्ष से मुलाकात करने उदयपुर पहुंच गए। सूत्रों की माने तो चित्तौड़गढ़ विधानसभा में नियुक्त 6 में से 5 मंडल अध्यक्ष विधायक चन्द्रभानसिंह गुट के होने के कारण खुल कर विरोध जताया और कहा कि सभी अग्रिम संगठनों, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की बिना सलाह के नियुक्तियां की गई है। यह भी जानकारी है कि मंडल अध्यक्ष पर 45 साल की आयु, पूर्व में किसी बड़े पद पर न होने जैसी शर्तें भी थी जिनका भी हवाला देकर विरोध जताया गया। नगर अध्यक्ष सुदर्शन रामपुरिया की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए गए।
इधर, जानकार सूत्रों ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने चर्चा के दौरान कहा कि क्षेत्रीय विधायक, सांसद व जिलाध्यक्ष से नाम मांगे गये थे और सहमति के बाद ही नियुक्ति की गई है। सूत्र बताते है कि इस मामले में सांसद ने कोई नाम नहीं दिया, जिसके कारण प्रस्तुत किए गए नामों पर मुहर लग गई। घोषित किए 6 मंडल अध्यक्षों में से पांच चन्द्रभान सिंह और एक रतन गाडरी की ओर से दिया गया था।
भाजपा की असंतुष्ट धड़े ने जहां प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात कर कहा है कि आगामी 29 तक फेरबदल करना आवश्यक है। इसके सभी लोग मिल कर विरोध जतायेंगे। इस बीच यह भी कहा गया कि प्रदेशाध्यक्ष ने निर्णय होने तक स्थगन दिया है लेकिन जिलाध्यक्ष आदि ने इससे इंकार किया है। अब यदि नियुक्त नगर अध्यक्ष सुदर्शन रामपुरिया या किसी मंडल अध्यक्ष को हटाया जाता है तो और भी हालत बिगड़ सकते है। हटाये जाने पर जैन समाज की नाराजगी शहर में भारी पड़ सकती है। वहीं जिन-जिन भी वर्गाें से मंडल अध्यक्ष बनाये गये है उनके समाज और समर्थकों की भी नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। ऐसे में भाजपा में अंदरखाने यह सियासत और तेज होने की संभावना है, जिसका नुकसान आला नेता को भुगतना पड़ सकता है।
भाजपा जिलाध्यक्ष रतन गाडरी ने बताया कि कुछ संतुष्ट लोगों ने प्रदेशाध्यक्ष से मुलाकात की है। फिलहाल स्टे आदि की कोई जानकारी नहीं है। प्रदेश द्वारा जो भी निर्देश दिए जायेंगे उसकी पालना होगी। फिलहाल जिन मंडल अध्यक्षों की घोषणा हुई है वहीं फाइनल है। ऊपरी निर्देशों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अखिल
