
नई दिल्ली, 27 फरवरी (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त समझौता वस्त्र उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा।

सीपी राधाकृष्णन ने यह बात आज तमिलनाडु के सलेम स्थित भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएचटी) के नवनिर्मित शैक्षणिक भवन का उद्घाटन के अवसर पर कही। इस अवसर पर उन्होंने भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत को तकनीक के साथ जोड़ने और इसे भविष्य के लिए तैयार एक ‘रचनात्मक उद्योग’ बनाने पर जोर दिया।

उपराष्ट्रपति ने हथकरघा को भविष्य के लिए तैयार रचनात्मक उद्योग में बदलने का आह्वान करते हुए कहा कि आईआईएचटी सलेम स्वदेशी शिल्प कौशल और आधुनिक वस्त्र विज्ञान के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है। पारंपरिक ज्ञान को समकालीन तकनीक के साथ मिलाकर संस्थान ने उत्पादकता बढ़ाई है गुणवत्ता मानकों में सुधार किया है और बाजार-उन्मुख उत्पादन को सक्षम बनाया है।साथ ही हाथ से बुने हुए वस्त्रों की प्रामाणिकता को भी संरक्षित किया है।
भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वाराणसी के रेशमी ब्रोकेड, बंगाल के जामदानी असम के मूगा रेशम कश्मीर के कानी शॉल आंध्र प्रदेश के वेंकटगिरी और मंगलगीरी बुनाई से लेकर मध्य प्रदेश की माहेश्वरी और चंदेरी साड़ियों तक भारतीय हथकरघा उत्पादों ने अपनी शिल्प कौशल और सांस्कृतिक विरासत के लिए वैश्विक मान्यता अर्जित की है।
उन्होंने तमिलनाडु की जीवंत बुनाई परंपराओं को भी रेखांकित किया जिनमें चेट्टीनाडु कंडांगी साड़ियां कांचीपुरम रेशम अरानी रेशम थिरुबुवनम रेशम चेन्निमलाई कंबल नागरकोइल वेष्टि तौलिए और मदुरै सुंगुडी साड़ियां शामिल हैं।
इस क्षेत्र की वृद्धि पर भरोसा जताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सलेम से यूरोपीय संघ को होने वाले वस्त्र निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। अंबूर से चमड़े के निर्यात में भी काफी वृद्धि होने की उम्मीद है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि 56 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते न केवल वस्त्र क्षेत्र को लाभ पहुंचाएंगे बल्कि चमड़ा और अन्य विनिर्माण उद्योगों जैसे संबद्ध क्षेत्रों के लिए भी विकास के अवसर पैदा करेंगे।
केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि आईएचटी सलेम में नए अकादमिक ब्लॉक का उद्घाटन केवल एक इमारत का उद्घाटन नहीं है बल्कि बुनकरों को सशक्त बनाने और हथकरघा क्षेत्र का आधुनिकीकरण करने की दृष्टि को सुदृढ़ करने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सादगी परंपरा और प्रौद्योगिकी का संगम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक सामूहिक कदम है।
इस मौके पर उपराष्ट्रपति ने सलेम स्थित भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान के मेधावी छात्रों को उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पदक और प्रमाण पत्र प्रदान किए।
उपराष्ट्रपति ने आईआईएचटी में आयोजित एक प्रदर्शनी का भी दौरा किया जहां देश भर के हथकरघा उत्पादों का प्रदर्शन किया गया था।
इसका मुख्य उद्देश्य संस्थागत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और शिक्षण अनुसंधान और कौशल विकास के लिए बेहतर सुविधाएं प्रदान छात्रों में नवाचार उद्यमिता और उद्योग-अनुकूल दक्षताओं को बढ़ावा देना है।
इस भवन में आधुनिक इंटरैक्टिव कक्षाएं एक सुसज्जित पुस्तकालय और डिजिटल पुस्तकालय एक सेमिनार हॉल संकाय कक्ष प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं और एक बोर्ड रूम हैं। साथ ही इसमें 11 भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थानों के लिए परीक्षा नियंत्रक का कार्यालय और अन्य आवश्यक शैक्षणिक और प्रशासनिक सुविधाएं भी हैं।
इस अवसर पर पर्यटन राज्य मंत्री आर. राजेंद्रन, सांसद टी.एम. सेल्वगनपति, सांसद एस.आर. शिवलिंगम, विधायक श्री ई. बालासुब्रमण्यम और वस्त्र मंत्रालय में विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना (आईएएस) उपस्थित रहीं।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी
