नई दिल्ली, 23 फ़रवरी (हि.स.)। दिल्ली के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय में दिल्ली (नागरिकों को समय पर सर्विस प्राप्त करने का अधिकार) एक्ट, 2011 के तहत सिस्टम-आधारित ऑटो-अपील मैकेनिज्म को शुरू करने और उसे और ज्यादा मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। यह पहल भारत सरकार के कैबिनेट सेक्रेटेरिएट द्वारा ‘डीरेगुलेशन एक्सरसाइज– फेज II’ के अंतर्गत दिए गए सुझावों के अनुरूप है, जिसमें राज्यों से टाइम-बाउंड सर्विस डिलीवरी फ्रेमवर्क सुनिश्चित करने के लिए रेगुलेटरी और प्रोसिजरल सुधार करने के लिए कहा गया है, ताकि सरकारी सेवाओं में सुगमता को बढ़ावा दिया जा सके और समयबद्ध सर्विस की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

बैठक के दौरान दिल्ली आरटीएस एक्ट के मौजूदा फ्रेमवर्क की बारीकी से समीक्षा की गई। वर्तमान में इस एक्ट के तहत 537 सर्विसेज नोटिफाई की गई हैं, जिसकी मॉनिटर ई-एसएलए पोर्टल के जरिए की जाती हैं। मौजूदा सिस्टम में सर्विस में देरी होने पर अपील दायर करने के लिए एप्लीकेंट को खुद दखल देने की जरूरत होती है और टाइमलाइन (एसएलए) खत्म होने के बाद ज़्यादातर मैनुअल जांच के जरिए जवाबदेही तय की जाती है।

प्रस्तावित सिस्टम-आधारित व्यवस्था का मकसद तय सर्विस टाइमलाइन खत्म होने पर खुद ऑटोमैटिक अपील फाइल हो जाएगी और एप्लीकेंट को कोई एक्शन लेने की जरूरत नहीं होगी। यह सिस्टम रियल-टाइम डैशबोर्ड और ट्रांसपेरेंट मॉनिटरिंग के साथ हायर अथॉरिटीज को स्ट्रक्चर्ड और टाइम-बाउंड एस्केलेशन सुनिश्चित करेगा।
बैठक में हरियाणा के ‘राइट टू सर्विस’ फ्रेमवर्क विशेषकर इसके ऑटो-अपील सिस्टम (एएएस) को एक मानक के रूप में प्रस्तुत किया गया। हरियाणा मॉडल ऑटोमैटिक एस्केलेशन तय पेनल्टी प्रोविज़न और समाधान तक लगातार डिजिटल निगरानी सुनिश्चित करता है। बैठक में राजधानी दिल्ली के कानूनी और प्रशासनिक संरचना के अनुरूप समान प्रावधानों को अपनाने पर विचार-विमर्श किया गया।
मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने आईटी डिपार्टमेंट को निर्देश दिया कि फ्रेमवर्क को फाइनल करने से पहले दूसरे राज्यों द्वारा अपनाई गई बेस्ट प्रैक्टिस की बारीकी से स्टडी किया जाए, ताकि राजधानी दिल्ली का मॉडल कानूनी तौर पर बेहद मजबूत, टेक्नोलॉजी में एडवांस्ड और एडमिनिस्ट्रेटिव तौर पर भी असरदार हो।
दिल्ली आरटीएस एक्ट, 2011 और उसके नियमों में ज़रूरी बदलावों के साथ-साथ सभी डिपार्टमेंट में रियल-टाइम इंटीग्रेशन के लिए ई-एसएलए पोर्टल के टेक्निकल अपग्रेडेशन पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई और करीब छह महीने की अनुमानित इम्प्लीमेंटेशन टाइमलाइन का पालन करने को कहा गया।
इस दौरान पंकज कुमार सिंह ने कहा कि हमारा मकसद एक प्रोएक्टिव और नागरिक-केंद्रित गवर्नेंस सिस्टम बनाना है, जहां अकाउंटेबिलिटी ऑटोमैटिक और ट्रांसपेरेंट हो। ऑटो-अपील मैकेनिज्म यह सुनिश्चित करने का काम करेगा कि होने वाली देरी को सिस्टम खुद ही ठीक करे और दिल्ली के नागरिकों पर कोई बोझ न पड़े। हम दिल्ली के लिए एक बेहद मजबूत और टिकाऊ फ्रेमवर्क बनाने के लिए दूसरे-तीसरे राज्यों के बेस्ट प्रैक्टिस को बारीकी से स्टडी करेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव
