मंदसौर, 20 अप्रैल (हि.स.)। मंदसौर जिले के सीतामऊ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष समारोह के उपलक्ष्य में सोमवार को प्रमुख नागरिक संगोष्ठी का आयोजन नगर के विवेकानंद हाई स्कूल के सभाकक्ष में मुख्य वक्ता रतलाम विभाग संघचालक तेजराम मांगरोदा शिक्षक एवं संघचालक राधे श्याम राठौर के अतिथि में आयोजित की गई।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता तेजराम मांगरोदा ने संघ की अपनी कार्य पद्धति संघ कैसे काम करता है। विषय पर अपने उद्बोधन में कहा कि पुरे विश्व को श्रेष्ठ बनाने का भाव हमारे यहां है। हम एकेश्वरवाद नहीं एकात्मकता वादी है। इदं मम जिसका अर्थ है यह मेरा नहीं है । यह भारतीय दर्शन में निस्वार्थ भाव, त्याग और समर्पण का प्रतीक है,हमारे यहां त्याग का भाव है। इन तत्वों के आधार पर श्रष्ठी चलेगी नहीं तो विनाश हैं।
मांगरोदा ने व्यक्ति निर्माण को लेकर कहा कि व्यक्ति निर्माण होगा कैसे इसके लिए काम करना पड़ेगा डॉ हेडगेवार ने सिद्धांत दिया। जिस प्रकार से पानी का एक भार जो हमें दिखाई देता है पर वह अंदर कितना है उसकी गहराई कितनी है।यह कोई नहीं जानता है। वैसे ही संघ जो दिखाई देता है वह दुर से सबको अपने नजरिए से दिखेगा पर उसकी गहराई अनंत है जिसमें ज्ञान आध्यात्म समर्पण, साधना, सेवा, जैसे रत्न छिपे हुए हैं जिसको जानने के लिए संघ कि शाखा में नियमित आना पड़ेगा। और इन सभी रत्नों को पाकर एक स्वयंसेवक व्यक्तित्व को प्राप्त कर लेता है।
मांगरोदा ने नैमेत्यिक को लेकर कहा कि नैमेत्यिक कार्यक्रम मतलब यदा कदा होने वाले आयोजन इन कभी कभी होने वाले कार्यक्रम में समय- समय जाना है
मांगरोदा ने संघ की प्रार्थना को विस्तार से समझाइश देते हुए कहा कि प्रार्थना में भारत माता के लिए भगवान के प्रति समर्पण का भाव है। और किसी व्यक्ति को नहीं भगवा ध्वज को गुरु मानकर करता है।हमें किसी पर हमला नहीं करना पर हम पर हमला कर दे वो जीत नहीं सके इसके लिए काम करते हैं। संघ का स्वयंसेवक राजनेताओं की तरह फोटो प्रचार प्रसार नहीं करता है उसे प्रचार प्रसार में नहीं समाज में व्याप्त बाधाओं से निपटने का भाव लेकर चलता है। आपने कहा कि यहां स्वयंसेवक यह सोचकर करता है कि मैं अपने लिए नहीं समाज राष्ट्र के लिए कार्य कर रहा हूं
संघ के शताब्दी वर्ष पर मन्दसौर में भव्य आयोजन, भैयाजी जोशी देंगे मार्गदर्शन
श्री कुशाभाऊ ठाकरे आॅडिटोरियम में 21 अप्रैल को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के निमित्त एक गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर संघ के पूर्व सरकार्यवाह भैया जोशी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहकर राष्ट्र निर्माण एवं सामाजिक दायित्वों पर मार्गदर्शन देंगे। उक्त आयोजन दो प्रमुख हिस्सों में गोष्ठियों के रूप में होगा जिसमें दोपहर के समय मातृशक्ति गोष्ठी और शाम को समाज के प्रबुद्धजनों के साथ संवाद सत्र रखा गया है। इन सत्रों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उपस्थित जनसमूह को प्रश्नोत्तर के माध्यम से मुख्य वक्ता से सीधा संवाद करने का अवसर मिलेगा। राष्ट्र प्रथम की भावना से ओतप्रोत इस बौद्धिक संगम में प्रवेश केवल आमंत्रित अतिथियों के लिए रहेगा। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संघ द्वारा सभी व्यापक तैयारी पूर्ण कर ली गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया
