जबलपुर, 05 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की जर्जर स्थिति को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने संज्ञान लिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर पूरे प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
गुरुवार को मामले की सुनवाई संजीव सचदेवा और विनय सराफ की डिविजन बेंच ने की। कोर्ट ने राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में संचालित सभी सरकारी स्कूलों की स्थिति से संबंधित जानकारी शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत की जाए।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन आने वाले स्कूलों ही नहीं, बल्कि स्थानीय निकायों द्वारा संचालित स्कूलों की स्थिति की जानकारी भी दी जाए। इसमें नगर निगम, नगर पालिका तथा अन्य स्थानीय प्राधिकरणों के अंतर्गत आने वाले स्कूल भी शामिल होंगे।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में जबलपुर के सरकारी स्कूलों की खराब स्थिति को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई थी, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आया। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था। लगभग सात माह बाद इस मामले की सुनवाई हुई और अब कोर्ट ने पूरे प्रदेश के स्कूलों की स्थिति को भी इसके दायरे में शामिल कर लिया है।
स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक कार्यालय में उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक जबलपुर संभाग के आठ जिलों में कुल 15 हजार 639 सरकारी प्राथमिक, माध्यमिक, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित हो रहे हैं। इनमें से कई स्कूल भवनों की हालत जर्जर पाई गई है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को निर्धारित की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक
