
– तलाकशुदा बेटियों भी होंगी पारिवारिक पेंशन के लिए पात्र, कैबिनेट ने राज्य के पेंशन नियमों में संशोधन को दी मंजूरी

भोपाल, 10 फरवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक में राज्य के पेंशन नियमों में एक ऐतिहासिक संशोधन को मंजूरी दी गई है।

मध्य प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों के हित में बड़ा निर्णय करते हुए 50 साल पुराने पेंशन नियम में संशोधन की मंजूरी दी है। अब चार लाख 60 हजार अंशदायी पेंशन योजना के दायरे में आने वाले कर्मचारी भी परिवार पेंशन के लिए पात्र होंगे, यानी कर्मचारी का निधन होने पर पत्नी और फिर आश्रितों को परिवार पेंशन मिलेगी। विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा और अविवाहित पुत्रियां भी आजीवन परिवार पेंशन की पात्र होंगी। इसके लिए अधिकतम 25 वर्ष की आयु सीमा भी समाप्त कर दी गई है। आश्रितों के लिए आय सीमा न्यूनतम पेंशन और महंगाई राहत मिलाकर निर्धारित होगी। आश्रित बड़ी संतान (बेटा हो या बेटी) को परिवार पेंशन की पात्रता होगी।
प्रदेश के एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का कार्यान्वयन) नियम 2026 तथा मध्य प्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत उपदान का संदाय) नियम 2026 का अनुमोदन किया गया है।
गौरतलब है कि 1976 में बने पेंशन नियम में भारत सरकार ने अब तक कई संशोधन किए हैं, जिन्हें प्रदेश में भी लागू करने की मांग लंबे समय से उठ रही थी। मुख्य सचिव अनुराग जैन जब अपर मुख्य सचिव वित्त थे, तब इसे लेकर सहमति भी बनी, लेकिन प्रक्रिया लंबी खिंचती चली गई। अब अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी ने समिति बनाई, जिसकी अनुशंसाओं को कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया गया। एक अप्रैल 2026 से इन्हें लागू करने का निर्णय लिया गया। नियम के प्रकाशन के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया गया है। इसका लाभ प्रदेश के सभी नियमित लगभग सात लाख कर्मचारियों को मिलेगा।
दिव्यांग आश्रितों को आजीवन लाभ: इन नियमों में सुधार
नियम में सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि एक जनवरी 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारी भी परिवार पेंशन के दायरे में आएंगे। इन कर्मचारियों को प्रतिमाह 14 प्रतिशत अंशदान देना होता है। इतनी ही राशि राज्य सरकार भी मिलाती है। परिवार पेंशन का लाभ कर्मचारी के निधन के बाद पति/पत्नी व आश्रित को पेंशन की पात्रता होगी। परिवार पेंशन के लिए आश्रित की आय सीमा न्यूनतम पेंशन (7,750 रुपये) के साथ अब महंगाई राहत जोड़कर निर्धारित होगी। मानसिक रूप से दिव्यांग आश्रित को भी आजीवन परिवार पेंशन का लाभ मिलेगा।
विभागों के अधिकार और केंद्रीय सेवा अवधि की गणना में सुधार
तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की पेंशन रोकने के मामले में निर्णय अब प्रशासकीय विभाग ही लेगा। जबकि, प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के मामले निर्णय के लिए कैबिनेट के समक्ष रखे जाएंगे। केंद्रीय सेवा से प्रदेश में सेवा देने के लिए आने वाले कर्मचारियों की पेंशन की गणना की प्रक्रिया में भी सुधार होगा। इसमें केंद्रीय सेवा की अवधि को भी जोड़ा जाएगा। पेंशनर्स एसोसिएशन ने नए नियम लागू करने के निर्णय का स्वागत किया है। इसके संरक्षक गणेश दत्त जोशी का कहना है कि 18 वर्ष के संघर्ष के सुखद परिणाम सामने आए हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर
