श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा से सोमवार को आ जाएगा बाबा विश्वनाथ के विवाह के वस्त्र

वाराणसी,07 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी (काशी) में महाशिवरात्रि पर्व पर श्री काशी विश्वनाथ धाम और ब्रज धाम के सांस्कृतिक संबंधों में एक नए अध्याय का शुरूआत होगी। महापर्व पर काशी विश्वनाथ धाम में पहली बार भगवान शिव के विवाह से जुड़े वस्त्र और श्रृंगार का सामान श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा से सोमवार नौ फरवरी को पहुंचेगा।

महाशिवरात्रि के दिन बाबा विश्वनाथ का भव्य श्रृंगार इन वस्त्रों और आभूषणों से किया जाएगा। महादेव के विवाह में नेग-पंचमेवा, फलाहारी चढ़ावा, वस्त्र, आभूषण और अन्य श्रृंगार सामग्री मथुरा से काशी भेजी जाएगी। इन सामग्रियों को विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में तैयार किया गया है। आठ फरवरी रविवार को मथुरा में सूर्योदय के बाद एक सजी ट्रक से विवाह सामग्री वाराणसी के लिए रवाना की जाएगी। यह जानकारी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से शनिवार को दी गई।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों से रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ को मथुरा से अबीर-गुलाल भेजे जाते हैं। वहीं, पिछले साल श्री काशी विश्वनाथ ट्रस्ट और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के साथ समझौता कर नेग और उपहार भेजने की परंपरा शुरू हुई। इसके साथ ही विश्वनाथ धाम और श्रीकृष्ण जन्मस्थान मथुरा के बीच उपहारों के आदान-प्रदान का क्रम शुरू हुआ है।
मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ)के अनुसार महाशिवरात्रि का पावन पर्व भगवान शिव के विवाहोत्सव के रूप में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इसी पवित्र अवसर पर इस वर्ष काशी में एक विशेष और अभिनव परंपरा का साक्षात्कार होने जा रहा है। मथुरा श्री कृष्ण जन्मस्थली से बाबा विश्वनाथ के लिए श्रृंगार एवं पूजन सामग्री भेंट स्वरूप प्राप्त होगी। यह भेंट निश्चित ही इस महापर्व की गरिमा को और अधिक बढ़ाएगी। गत वर्ष रंगभरी एकादशी पर्व पर धार्मिक सांस्कृतिक आदान प्रदान का नवाचार काशी मथुरा के मध्य प्रारंभ किया गया था।
इसी प्रकार पवित्र तीर्थ जल योजना द्वारा काशी रामेश्वरम धाम का संबंध भी पुनः परिभाषित किए जाने का नवाचार भी प्रारंभ हुआ है। इस वर्ष के नवाचार में कृष्ण जन्मभूमि से श्री काशी विश्वनाथ महादेव को महाशिवरात्रि पर भेंट तथा कृष्ण जन्माष्टमी पर श्री काशी विश्वनाथ महादेव द्वारा लड्डू गोपाल को उपहार प्रेषित किए जाने का नवाचार एक नवीन अध्याय होगा। उन्होंने कहा कि यह नवाचार पूर्ण रूप से हरि–हर के अद्भुत संबंध को दर्शाता है। हरि अर्थात भगवान विष्णु और हर अर्थात भगवान शिव-दोनों का संबंध सनातन परंपरा में अविच्छिन्न और पूरक माना गया है।
विष्णु पालन के प्रतीक हैं तो शिव संहार और कल्याण के। दोनों का समन्वय सृष्टि के संतुलन का आधार है। मथुरा जन्मस्थली से बाबा विश्वनाथ के शृंगार का आगमन इसी सनातन एकत्व का सजीव प्रतीक है। महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, समरसता और सनातन संस्कृति की एक अनुपम अनुभूति प्रदान करेगा तथा हरि–हर के शाश्वत संबंध को नई चेतना के साथ जनमानस के समक्ष प्रस्तुत करेगा। उन्होंने बताया कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास इस पावन भेंट के लिए श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर न्यास को धन्यवाद प्रेषित किया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी
