गोरखपुर, 17 अप्रैल (हि.स.)। रवि किशन शुक्ला ने आज संसद में महिला आरक्षण से संबंधित विधेयकों पर जोरदार समर्थन व्यक्त करते हुए इसे देश के इतिहास का “स्वर्णिम दिन” बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “नए भारत” के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सांसद ने अपने संबोधन में कहा कि यह कोई चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, अधिकार और सशक्तिकरण का विषय है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस गंभीर विषय पर राजनीति कर रहा है, जबकि सरकार ने महिलाओं के वास्तविक मुद्दों को समझते हुए ठोस कदम उठाए हैं।
अपने निजी जीवन के संघर्षों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने गरीबी और अभाव में महिलाओं की पीड़ा को बहुत करीब से देखा है—चाहे वह शौचालय की कमी हो या बुनियादी सुविधाओं का अभाव। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इन समस्याओं का समाधान संभव हुआ और देश में व्यापक जागरूकता आई।
सांसद ने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र—सेना, शिक्षा, खेल और राजनीति—में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रही हैं। ऐसे में उन्हें विधायिका में उचित प्रतिनिधित्व मिलना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने 33% महिला आरक्षण को समय की मांग बताते हुए कहा कि यह देश की आधी आबादी को सशक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
गोरखपुर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों की महिलाओं में राजनीतिक भागीदारी को लेकर उत्साह है और वे अब आगे आकर नेतृत्व करना चाहती हैं। उन्होंने परिसीमन (Delimitation) की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को अवसर मिल सके।
अंत में सांसद ने कहा कि यदि महिला आरक्षण विधेयक पारित नहीं हुआ तो देश की महिलाएं इसे गंभीरता से लेंगी और इसका प्रभाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भी पड़ेगा। उन्होंने पूरे विश्वास के साथ कहा कि यह विधेयक पारित होकर ही रहेगा और महिलाओं को उनका अधिकार अवश्य मिलेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय
