गुवाहाटी, 09 फरवरी (हि.स.)। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने सोमवार को एक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए नागरिकता से जुड़े मुद्दे पर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों की नागरिकता बदलने का कोई अधिकार नहीं है।

मुख्यमंत्री ने सवालिया लहजे में कहा कि क्या माता-पिता अपने बच्चों की जाति या धर्म मनमाने ढंग से बदल सकते हैं और उसी तरह नागरिकता भी बदली नहीं जा सकती। उन्होंने इस तर्क के माध्यम से अपने रुख को स्पष्ट किया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई द्वारा उठाए गए सवालों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डॉ. सरमा ने कहा कि यदि यह मामला जुवेनाइल कोर्ट तक जाता है तो वह इसका स्वागत करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने पासपोर्ट और वीज़ा से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज सार्वजनिक रूप से दिखा दिए हैं और सवाल उठाया कि इससे अधिक और कौन-सा प्रमाण दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनके द्वारा कही गई किसी भी बात को असत्य साबित नहीं किया जा सकता और गौरव गोगोई उनके किसी भी बयान का खंडन करने में असफल रहे हैं। डॉ. सरमा के ये बयान नागरिकता को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच सामने आए हैं।
असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने आज दावा किया कि कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने अपने नाबालिग बच्चों की मर्ज़ी के बिना उनका धर्म और उनकी नागरिकता बदल दी है। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले तब तक नहीं लिए जा सकते जब तक कोई व्यक्ति बालिग न हो जाए।
मुख्यमंत्री की टिप्पणियों से एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा एक कानूनी और संवैधानिक बहस में बदल जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश
