यमुनानगर, 14 मार्च (हि.स.)। यमुनानगर के संतपुरा गुरुद्वारे के प्रबंधन को लेकर शुक्रवार देर रात तनावपूर्ण स्थिति बन गई। अतिरिक्त सत्र न्यायालय द्वारा फर्जी दस्तावेजों के मामले में संत जगमोहन सिंह को दोषी ठहराए जाने और सजा बरकरार रखने के बाद गुरुद्वारे के नियंत्रण को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए।

शुक्रवार रात संत करमजीत सिंह अपने समर्थकों और श्रद्धालुओं के साथ गुरुद्वारे पहुंचे और ट्रस्ट के अधिकार का हवाला देते हुए प्रबंधन संभालने की कोशिश की। उस समय परिसर में संत जगमोहन सिंह के समर्थक मौजूद थे, जिन्होंने विरोध किया। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और हंगामा होने से हालात बिगड़ गए।
प्रशासन ने हालात को देखते हुए तुरंत अतिरिक्त पुलिस बल बुला लिया और पूरे परिसर को सुरक्षा घेरे में ले लिया। पुलिस अधिकारियों ने पहले समझाइश के माध्यम से स्थिति शांत कराने का प्रयास किया और गुरुद्वारे में मौजूद लोगों से परिसर खाली करने की अपील की। हालांकि प्रारंभिक स्तर पर विरोध जारी रहने पर पुलिस को सख्ती बरतनी पड़ी और भीड़ को बाहर निकालकर व्यवस्था बहाल की गई। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद रहे और स्थिति पर नजर बनाए रखी। स्थिति नियंत्रित होने के बाद देर रात संत करमजीत सिंह अपने समर्थकों के साथ गुरुद्वारे में प्रवेश किया। उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेका और संगत को संबोधित करते हुए कहा कि अब गुरुद्वारे का संचालन ट्रस्ट के माध्यम से किया जाएगा तथा वह स्वयं सेवादार के रूप में सेवा करेंगे।
उन्होंने बताया कि लंबे समय बाद वह गुरुद्वारे में आए हैं और ट्रस्ट की ओर से शिक्षा से जुड़े संस्थान स्थापित करने सहित डेरे के विकास के लिए कई योजनाओं पर कार्य किया जाएगा।
इस संबंध में एएसपी अमरेंद्र सिंह ने बताया कि प्रशासन ने अदालत के आदेश के अनुरूप कार्रवाई की है। किसी भी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया गया है और केवल शांति बनाए रखने के लिए परिसर को खाली कराया गया। उनके अनुसार क्षेत्र में अब स्थिति पूरी तरह सामान्य है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार
