यमुनानगर, 06 फ़रवरी (हि.स.)। मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण व शहरी) की ओर से शुक्रवार को यमुनानगर में विरोध प्रदर्शन किया गया। कांग्रेस कार्यकर्ता अनाज मंडी गेट पर एकत्र हुए, जहां केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ धरना दिया गया। इसके पश्चात कार्यकर्ताओं ने रोष मार्च निकालते हुए जिला उपायुक्त कार्यालय तक पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन के माध्यम से कांग्रेस ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वीबी जी राम जी का कड़ा विरोध जताया। पार्टी ने इस अधिनियम को तत्काल वापस लेने और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल करने की मांग की। जिला प्रधान देवेंद्र ने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों, वंचितों और श्रमिक परिवारों के लिए कानूनी सुरक्षा का आधार रहा है। इस कानून ने ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा, सामाजिक न्याय, विकेंद्रीकरण और श्रम की गरिमा को मजबूती दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि नए अधिनियम के माध्यम से इस अधिकार-आधारित ढांचे को कमजोर कर केंद्रीकृत और विवेकाधीन व्यवस्था लागू करने का प्रयास किया जा रहा है, जो ग्रामीण हितों के प्रतिकूल है।
देवेंद्र ने कहा कि मनरेगा के तहत प्रति परिवार प्रति वर्ष 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी तथा समय पर काम न मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान था, जिसे नए कानून में सीमित किया जा रहा है। रोजगार को केवल अधिसूचित क्षेत्रों तक सीमित करना और ग्राम सभाओं की भूमिका घटाना, लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करता है।
ग्रामीण प्रधान नरपाल सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा 125 दिनों के रोजगार के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। कई क्षेत्रों में लोगों को 50 दिनों से भी कम काम मिल पाता है। कृषि सीजन के दौरान कार्य रोकने जैसे प्रावधानों से रोजगार के अवसर घट रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने चेताया कि मनरेगा के कमजोर होने से ग्रामीण गरीबी, बेरोजगारी और पलायन बढ़ेगा, जिसका सामाजिक और आर्थिक असर गंभीर होगा। पार्टी ने रोजगार की गारंटी बढ़ाकर 200 दिन करने, समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने और अधिनियम में महात्मा गांधी का नाम पुनः बहाल करने की मांग दोहराई।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार
