नई दिल्ली, 08 फरवरी (हि.स.)। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने अपने विशेष ‘मिशन-मोड’ अभियान के तहत यूआईडीएआई ने रविवार को देश भर के 83 हजार स्कूलों में शिविर आयोजित कर 1 करोड़ से अधिक अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं।

इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय के अनुसार यूआईडीएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भुवनेश कुमार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के साथ समन्वय स्थापित कर इस पहल को गति दी। क्षेत्रीय कार्यालयों और शिक्षा विभागों के अथक परिश्रम से मात्र 5 महीनों में इस विशाल लक्ष्य को प्राप्त किया गया। आधार नियमों के मुताबिक, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों के फिंगरप्रिंट और आइरिस (पुतली) स्कैन नहीं लिए जाते क्योंकि वे उस समय परिपक्व नहीं होते। इसलिए 5-15 की आयु वर्ग में प्रवेश करने पर बायोमेट्रिक्स को अपडेट करना अनिवार्य है। अपडेट न होने की स्थिति में बच्चों को सरकारी योजनाओं, स्कॉलरशिप और नीट, जेईई, सीयूईटी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के पंजीकरण में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

बच्चों और अभिभावकों को प्रोत्साहित करने के लिए यूआईडीएआई ने कुछ रियायतें दी हैं। इनमें 7-15 आयु वर्ग के बच्चों के लिए 01 अक्टूबर, 2025 से एक वर्ष के लिए बायोमेट्रिक अपडेट पूरी तरह निःशुल्क कर दिया गया है। स्कूलों में आयोजित शिविरों के अलावा, देश भर के आधार सेवा केंद्रों और नामांकन केंद्रों पर भी जबरदस्त उत्साह देखा गया। इसी अवधि के दौरान केंद्रों पर लगभग 1.3 करोड़ बच्चों ने अपने आधार फॉर्म भरे हैं।
यूआईडीएआई ने इस अभियान की शुरुआत सितंबर, 2025 में की थी। इस सफलता के पीछे शिक्षा मंत्रालय के यूआईडीएआई (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस) पोर्टल के साथ तकनीकी एकीकरण की अहम भूमिका रही। इस तालमेल से उन बच्चों की पहचान करना आसान हो गया, जिनका बायोमेट्रिक अपडेट बकाया था।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी
