न्यूयॉर्क/अबू धाबी, 07 अप्रैल (हि.स.)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने से जुड़ा अहम प्रस्ताव यूनाइटेड नेशंस (यूएन) में पारित नहीं हो सका। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रस्ताव को रूस और चीन ने वीटो कर दिया, जिससे यह पहल विफल हो गई। इस घटनाक्रम के बाद संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए नाराजगी जताई है।

जानकारी के अनुसार, यह प्रस्ताव बहरीन की ओर से पेश किया गया था, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने की अपील की गई थी। खास बात यह रही कि प्रस्ताव में किसी प्रकार की सैन्य कार्रवाई का उल्लेख नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य केवल इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खोलना था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्ताव को लेकर सदस्य देशों के बीच सहमति बनाना आसान नहीं था। पिछले दो हफ्तों में इसे करीब छह बार संशोधित किया गया, क्योंकि कई देशों ने इसके विभिन्न प्रावधानों पर आपत्ति जताई थी। इसके बावजूद अंतिम रूप से इसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया।
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भूमिका पर सवाल उठाते हुए यूएई ने कहा कि परिषद इस गंभीर वैश्विक मुद्दे पर कोई ठोस निर्णय लेने में विफल रही है। यूएई ने जोर देकर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य सभी देशों के लिए खुला रहना चाहिए और किसी भी देश को इसे बाधित करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
यूएई ने यह भी संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहेगा और समाधान के लिए प्रयास जारी रखेगा।
उल्लेखनीय है कि इस प्रस्ताव के विफल होने से न केवल क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिशों को झटका लगा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर भी अनिश्चितता बढ़ गई है। साथ ही यूएन में सहमति का अभाव यह दर्शाता है कि इस जटिल संकट का समाधान फिलहाल दूर है, जबकि दुनिया भर की निगाहें इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर टिकी हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय
