जोधपुर, 28 जनवरी (हि.स.)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के हालिया नियमों के विरोध में जोधपुर में विभिन्न सामाजिक संगठनों और समुदायों ने एकजुट होकर आंदोलन का ऐलान किया है। विरोध के तहत एक फरवरी को जोधपुर बंद का आह्वान किया गया है। इस संबंध में आयोजित प्रेस वार्ता में सवर्ण समाज सहित कई संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि इस बंद को व्यापारिक संगठनों और विभिन्न समाजों का व्यापक समर्थन प्राप्त हो रहा है।

प्रेस वार्ता में बताया गया कि आंदोलन को लेकर व्यापारिक संगठनों से संवाद हो चुका है और उन्होंने सहयोग का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही 36 कौमों के लोगों के इस आंदोलन से जुड़ने की सहमति भी जताई गई है, जिससे बंद को सफल बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है।

ब्राह्मण महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष कन्हैयालाल पारीक ने कहा कि यूजीसी के अंतर्गत हाल ही में किए गए कुछ प्रावधान समानता के नाम पर लागू किए गए हैं, लेकिन वे समाज में विभाजन को बढ़ावा देने वाले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन बदलावों के माध्यम से हिंदू समाज को विभिन्न वर्गों में बांटने का प्रयास किया जा रहा है। इसी के विरोध में इसे ‘काला कानून’ बताते हुए एक फरवरी को जोधपुर बंद का निर्णय लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है। ओबीसी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ब्राह्मण, बनिया, जैन, माहेश्वरी सहित सभी समाजों से एकजुट होकर आंदोलन में भाग लेने का आह्वान किया गया है, ताकि सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिल सके।
राष्ट्रीय स्तर पर संवाद को लेकर पारीक ने बताया कि करणी सेना, ब्राह्मण समाज के प्रमुख संगठनों, माहेश्वरी समाज सहित कई सामाजिक संगठनों से बातचीत चल रही है और आगे की रणनीति सामूहिक रूप से तय की जा रही है। उन्होंने कहा कि विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में रहेगा। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो भविष्य में पंचायत चुनावों में मतदान के बहिष्कार जैसे कदमों पर भी विचार किया जा सकता है।
इस अवसर पर ब्राह्मण महासभा के पूर्व जिला अध्यक्ष हस्तीमल सारस्वत ने कहा कि इस कानून के खिलाफ युवाओं में व्यापक असंतोष है, जो अब खुले तौर पर सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि देशभर में चल रहे विरोध से यह स्पष्ट है कि समाज में इस विषय को लेकर गहरी नाराजगी है।
करणी सेना के संभाग प्रभारी मानसिंह मेड़तिया ने कहा कि ऐसे नियमों से समाज में यह भावना बन रही है कि आने वाली पीढ़ी का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि विरोध शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा, लेकिन यदि आवाज को दबाने का प्रयास हुआ तो इसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।
प्रेस वार्ता में शिक्षक नेता शंभू सिंह मेड़तिया, गजेंद्र सिंह राठौड़, अनिल माथुर, दिनेश गौड़, प्रकाश जैन, श्याम सिंह साजडा, राधेश्याम डागा सहित विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश
