वाराणसी, 31 जनवरी (हि.स.)। वाराणसी के ताज होटल में आयोजित बनारस लिट फेस्ट (चतुर्थ) के दूसरे दिन शनिवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद त्यागी को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. आनंद ने कहा कि ऐसे आयोजन भारतीय परंपरा का सुंदर उदाहरण है। इसका मुख्य प्रयोजन साहित्य सहित कला की अन्य विधाओं पर गहन चर्चाएं करना है। ऐसे समय में जब यूथ का ज़्यादा समय मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर खा रहा है, उस समय में साहित्यकारों पर समाज को एक स्वरूप प्रदान करने में अपना योगदान देते हैं तो उनका दायित्व और बढ़ जाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयोजनों से युवा पीढ़ी को हम पुरातन परंपराओं से जोड़ पाएंगे। उन्हें मोबाइल की दुनिया से बाहर कर पाएंगे।

इसी क्रम में, सारस्वत मंच पर “एआई फॉर जर्नलिज्म एंड राइटरस” विषय पर विचारोत्तेजक चर्चा का आयोजन किया गया। इस सत्र में कश्यप कोंपले ने पत्रकारिता और लेखन में एआई की भूमिका, उपयोग और सावधानियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्हाेंने कहा कि लेखन के शुरुआती दौर में छात्रों को एआई पर अत्यधिक निर्भर नहीं होना चाहिए। ऐसा करने से उनकी सोचने, समझने और विश्लेषण करने की क्षमता सीमित हो सकती है। उन्होंने जोर दिया कि लेखन की बुनियाद अनुभव, निरीक्षण और संवेदना से बनती है, जिसे कोई भी तकनीक पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं कर सकती। एआई को सहायक उपकरण के रूप में देखा जाए रचनात्मकता के विकल्प के रूप में नहीं देखना चाहिए।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में अधिकांश लोग एआई की कुल क्षमताओं का केवल 5 से 10 प्रतिशत ही उपयोग कर पा रहे हैं। यदि सही प्रशिक्षण, विवेक और उद्देश्य के साथ इसका प्रयोग किया जाए, तो एआई शोध, तथ्य-संग्रह, भाषा-संपादन और समय-प्रबंधन में पत्रकारों व लेखकों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकता है। साथ ही उन्होंने नैतिकता, तथ्य-जांच और मानवीय दृष्टि को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
————-
—————
हिन्दुस्थान समाचार / शरद
