कोलकाता, 04 अप्रैल (हि.स.)। ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कोलकाता स्थित राष्ट्रीय पुस्तकालय में शुक्रवार अपराह्न एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ के गायन से हुई, जिसके साथ ही पूरे सभागार में देशभक्ति का वातावरण बन गया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने संबोधन किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व तथा वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
इसके बाद कोलकाता स्थित अरविंद भवन के निदेशक विश्वजीत गांगुली ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम नई पीढ़ी को देश के इतिहास और संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में अन्य कई विशिष्ट व्यक्तियों की भी उपस्थिति रही, जिन्होंने देशभक्ति तथा स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद किया।
कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण विशेषता स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों के सदस्यों की उपस्थिति रही। इस दौरान कई लोगों ने यह चिंता व्यक्त की कि आने वाली पीढ़ियां स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को कितना याद रखेंगी और उनके इतिहास को कितना महत्व देंगी। उन्होंने नई पीढ़ी में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सांस्कृतिक सत्र में कई देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए गए। ‘मुक्ति के मंदिर के सोपान तले’ गीत की प्रस्तुति दिग्विजय चौधरी ने दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इसके अलावा अन्य प्रस्तुतियों के माध्यम से भी देश के प्रति प्रेम और सम्मान की भावना व्यक्त की गई।
पूरे कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि और ‘वंदे मातरम्’ जैसे ऐतिहासिक गीत को केंद्र में रखकर आयोजित यह कार्यक्रम नई पीढ़ी को देश के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को जानने और सम्मान करने का महत्वपूर्ण संदेश दे गया।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर
