नई दिल्ली, 09 फ़रवरी (हि.स.)। भारतीय रेलवे ने देश में अगली पीढ़ी की यात्री परिवहन व्यवस्था को मजबूती देने के लिए सात नई हाई-स्पीड रेल (एचएसआर) कॉरिडोर परियोजनाओं के क्रियान्वयन को तेज करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। केंद्रीय बजट 2026 में घोषित इन परियोजनाओं को लेकर रेलवे बोर्ड ने राष्ट्रीय उच्च गति रेल निगम लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

प्रस्तावित सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–बेंगलुरु, हैदराबाद–चेन्नई, चेन्नई–बेंगलुरु, दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी मार्ग शामिल हैं। ये कॉरिडोर देश के प्रमुख आर्थिक, औद्योगिक और सांस्कृतिक केंद्रों को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग के रूप में विकसित किए जाएंगे।

रेल मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि रेलवे बोर्ड में हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद (एनएचएसआरसीएल) को निर्देश दिया गया है कि जिन कॉरिडोरों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पहले से तैयार है, उन्हें वर्तमान लागत अनुमानों के साथ संशोधित किया जाए, ताकि परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता का सटीक आकलन किया जा सके।
इसके साथ ही रेलवे बोर्ड ने देशभर में हाई-स्पीड रेल प्रणालियों के मानकीकरण, प्रत्येक परियोजना के लिए समर्पित फील्ड-आधारित कोर टीमों के गठन तथा अनुबंध दस्तावेजीकरण सहित पूर्व-निर्माण गतिविधियों को शुरू करने पर जोर दिया है। आगामी हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं के लिए प्रशिक्षित तकनीकी मानव संसाधन की योजना बनाने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई है।
रेल मंत्रालय के अनुसार सभी कार्य बिंदुओं की प्रगति की समय-समय पर उच्च स्तर पर समीक्षा की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार को लेकर गंभीर और प्रतिबद्ध है।
ये सात नई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी, यात्रियों को बेहतर सुविधा और पर्यावरण के अनुकूल, कम-उत्सर्जन परिवहन विकल्प उपलब्ध कराने के साथ-साथ क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी गति देने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार
