जयपुर, 10 फ़रवरी (हि.स.)। वन राज्य मंत्री संजय शर्मा की अध्यक्षता में मंगलवार को शासन सचिवालय में राज्य वन्यजीव मंडल की स्थायी समिति की सप्तम बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन्यजीव संरक्षण, मानव–वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम तथा पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की समृद्ध वन्यजीव संपदा के संरक्षण के लिए सतत और प्रभावी कदम उठा रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि संरक्षित वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की समुचित निगरानी के लिए एक विशेष सेल का गठन किया जाए, जो नियमित रूप से विभाग को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। साथ ही, प्रत्येक माह विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचार एवं विकास कार्यों की जानकारी आमजन तक पहुंचाई जाए।

बैठक में सात नवंबर को आयोजित पिछली बैठक की कार्यवाही का अनुमोदन किया गया तथा प्रगति रिपोर्ट पर विस्तृत चर्चा हुई। इसके साथ ही वन्यजीव मंडल के सदस्यों द्वारा प्रस्तुत नए प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया, जिनमें संरक्षित वन क्षेत्रों में सड़कों के नवीनीकरण, विद्युत लाइनों के संचालन और सामुदायिक सहभागिता से जुड़े प्रस्ताव शामिल रहे।
वन राज्य मंत्री ने निर्देश दिए कि वन क्षेत्रों में स्थित ऐतिहासिक महत्व की इमारतों, स्मारकों और शिकार हॉल का समुचित संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। इन स्थलों का चिन्हांकन कर उन्हें पर्यटन की दृष्टि से व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाए, जिससे विरासत संरक्षण के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिले।
उन्होंने वाइल्डलाइफ इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करने पर बल देते हुए कहा कि इससे वन्यजीव मामलों में वन विभाग की पुलिस पर निर्भरता कम होगी। वन्यजीवों की जनसंख्या प्रबंधन और मानव–वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर उसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
शर्मा ने कहा कि किसी भी वन्यजीव की मृत्यु की स्थिति में विभाग द्वारा तत्काल प्रेस वार्ता कर तथ्यात्मक जानकारी साझा की जाए, ताकि भ्रामक व अपुष्ट सूचनाओं पर रोक लगाई जा सके। इसके साथ ही उन्होंने फॉरेस्ट कम्युनिटी डवलपमेंट प्रोग्राम संचालित करने के निर्देश देते हुए कहा कि इससे वन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों को आजीविका के अवसर मिलेंगे और क्षेत्र का समग्र विकास होगा।
बैठक में कराकल संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की गई तथा वन्यजीव संरक्षण की दिशा में भावी कार्ययोजना पर सदस्यों से सुझाव आमंत्रित किए गए। अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार ने कहा कि वन्यजीव मृत्यु के मामलों में विभागीय स्तर पर स्पष्ट प्रोटोकॉल तय किया जाए।
साथ ही, वन क्षेत्रों से सटे गांवों में प्रत्येक माह बैठक आयोजित कर स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित किया जाए और उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख पवन कुमार उपाध्याय, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक के.सी.ए. अरुण प्रसाद, समिति सदस्य डॉ. रवि सिंह, राजपाल सिंह तंवर, निरंजन कुमार वसु, नम्रता भारतीय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित
