उज्जैन, 09 फ़रवरी (हि.स.)। विलक्षण प्रतिभा आपके पूर्व जन्म के कर्मों का फल है। सृष्टि की सृजनात्मकता ,सनातन धर्म के सिद्धांत,वैदिक ज्ञान और हिंदू रीति रिवाजों की जानकारी हर व्यक्ति को होना चाहिए।

यह बात उपनिषद् आश्रम के पीठााधीश्वर स्वामी वितरागानंद सरस्वती ने कही। वे सोमवार कों कालिदास संस्कृत अकादेमी परिसर स्थित पं.सूर्यनारायण व्यास संकुल में आयोजित पुस्तक विमोचन एवं सेवानिवृत्ति सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से सेवानिवृत्त हुए इंजीनियर शिवेंद्र शर्मा की सेवानिवृत्ति एवं उनकी पुस्तक इंजी.शिवेंद्र शर्मा-सृजन एवं सेवा का अद्भुत संगम का विमोचन हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सिंहस्थ विकास प्राधीकरण के पूर्व अध्यक्ष दिवाकर नातू ने की। उन्होने मानव जीवन को तिरंगे में ढालने पर ज़ोर दिया। ये तीन रंग है-स्वस्थ रहिये,मस्त रहिये और व्यस्त रहिये। मुख्य अतिथि शैलेन्द्र पाराशर ने कहाकि शर्मा की रचनाएं लेखन कौशल तक सीमित नहीं है, बल्की चिंतन, संवेदना और जीवन दृष्टि के माध्यम से अभिव्यक्त होकर समाज का दिग्दर्शन भी कराता है। सारस्वत अतिथि हरिमोहन बुधोलिया ने कहाकि समाज, प्रकृति, मनुष्य और जीवन के स्पंदन को अनुभव कर पाने की अन्तर्निहित क्षमता शर्मा की रचनाओ में अभिव्यक्त हुई है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पत्रकार डॉ.ओमप्रकाश प्रजापति ने कहा कि पुस्तक की रचनाओ में केवल कल्पना नहीं बल्कि सामाजिक सरोकारों की स्पष्ट झलक मिलती है। जल संरक्षण, शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत और मानवीय मूल्यों पर इनके विचार पाठको को सोचने पर विवश करते है। साहित्यकार शिव चौरसिया ने कहा कि शासकीय सेवा में, वो भी इंजीनियर पद पर रहते हुए साहित्यिक अवदान सभी के लिए प्रेरणा स्त्रोत है। पाखुरी वक्त ने शर्मा के लेखन को नैतिक मूल्यों का संरक्षण और सकारात्मक दिशा का मार्ग प्रशस्त करना बताया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सीमा जोशी द्वारा सरस्वती वन्दना के गायन के साथ हुआ। संचालन डॉ. प्रतिभा शर्मा ने किया। इस अवसर पर हरिहर शर्मा,संजय मिश्रा, राजेश शारडा उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल
