आसनसोल, 01 अप्रैल (हि. स.)। आसनसोल के पोलो ग्राउंड में इन दिनों चल रहा ऐतिहासिक अजंता सर्कस लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। चुनावी माहौल के बावजूद सर्कस में दर्शकों की जबरदस्त भीड़ उमड़ रही है, जिससे यह साफ है कि पारंपरिक मनोरंजन के प्रति लोगों का लगाव भी कायम है। लेकिन अब बदलते नियमों और परिस्थितियों के कारण सर्कस के परंपरा विलुप्ति की कगार पर है।

सर्कस के मैनेजर हैप्पी ने बताया कि इस सर्कस में लगभग 70 कलाकार काम कर रहे हैं और इन सभी की आजीविका का एकमात्र साधन यही सर्कस है। हालांकि उन्होंने चिंता जताई कि पिछले कुछ वर्षों में सर्कस की रौनक पहले जैसी नहीं रही। एक समय था जब शेर, हाथी और घोड़ों जैसे बड़े आकर्षण सर्कस का हिस्सा होते थे, लेकिन अब बदलते नियमों और परिस्थितियों के कारण वैसा प्रदर्शन संभव नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में सर्कस की आमदनी भी उम्मीद के मुताबिक नहीं हो रही है, जिससे इसके भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। उन्होंने भावुक होकर कहा, ”अगर यही स्थिति बनी रही तो वह दिन दूर नहीं जब सर्कस सिर्फ कहानियों में सिमटकर रह जाएगा और आने वाली पीढ़ियां इसे केवल किस्सों में ही सुनेंगी।”
मैनेजर ने यह भी बताया कि सर्कस को बचाने के लिए कई बार सरकार से आर्थिक सहायता की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस मदद नहीं मिल पाई है। उनका मानना है कि सरकारी सहयोग ही इस परंपरागत कला को जीवित रख सकता है।
उन्होंने सर्कस मालिक की सराहना करते हुए कहा कि लगातार नुकसान के बावजूद वे सर्कस को चला रहे हैं, क्योंकि उनके मन में कलाकारों की आजीविका को लेकर गहरी चिंता है। उन्होंने कहा, “अगर सर्कस बंद हो गया, तो वर्षों से इससे जुड़े कलाकारों का क्या होगा, वे कहां जाएंगे—यही सोचकर मालिक इसे किसी तरह चला रहे हैं।”
चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद अजंता सर्कस का जारी रहना न केवल मनोरंजन की परंपरा को जीवित रखे हुए है, बल्कि उन दर्जनों परिवारों की उम्मीद भी बनाए हुए है, जिनकी रोजी-रोटी इससे जुड़ी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा
