विश्व संवाद केंद्र, मध्यप्रदेश और सतपुड़ा चलचित्र समिति ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्ष की यात्रा पर आधारित फिल्म “शतक” की स्पेशल स्क्रीनिंग का किया आयोजन

भोपाल, 12 मार्च (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में उसकी वैचारिक एवं संगठनात्मक यात्रा को प्रस्तुत करने वाली फिल्म “शतक” की विशेष स्क्रीनिंग का आयोजन गुरुवार विश्व संवाद केंद्र, भोपाल एवं सतपुड़ा चलचित्र समिति के संयुक्त तत्वावधान में डीडीएक्स सिनेमा, कोलार में किया गया। इस विशेष स्क्रीनिंग में लगभग सौ से अधिक श्रोताओं ने सहभागिता करते हुए फिल्म के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्षों की वैचारिक यात्रा, उसके कार्य विस्तार और राष्ट्र जीवन में उसके योगदान को जाना।
इस अवसर पर पत्रकार, शोधार्थी, समाजसेवी, शिक्षाविद् तथा पत्रकारिता के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कई श्रोता अपने परिवारों के साथ भी इस विशेष स्क्रीनिंग में शामिल हुए और फिल्म के माध्यम से संघ की कार्यपद्धति, विचार और समाज जीवन में उसकी भूमिका को समझने का प्रयास किया।
फिल्म के प्रदर्शन के पश्चात उपस्थित श्रोताओं ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि “शतक” केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक वैचारिक आंदोलन की यात्रा का दस्तावेज है जिसने पिछले सौ वर्षों में राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित व्यक्तित्वों का निर्माण किया है। उन्होंने कहा कि संघ ने समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे कार्यकर्ताओं को तैयार किया है जो निस्वार्थ भाव से राष्ट्र और समाज के लिए कार्य कर रहे हैं।
वहीं अन्य श्रोताओं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को केवल एक संगठन के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि यह एक व्यापक विचारधारा है, जिसका प्रभाव समाज के विविध क्षेत्रों में दिखाई देता है। फिल्म इस तथ्य को प्रभावी ढंग से सामने लाती है।
कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं और विद्यार्थियों ने भी फिल्म को प्रेरक बताते हुए कहा कि वर्तमान ‘जेन-जी’ पीढ़ी के लिए इस प्रकार की फिल्मों को देखना आवश्यक है, ताकि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समझ सकें। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं कि फिल्म देखने के बाद कोई संघ से जुड़े, लेकिन संघ को समझने और उसके कार्य को जानने के लिए इस प्रकार का प्रयास महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम का समापन उपस्थित सभी श्रोताओं के प्रति आभार ज्ञापन के साथ हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी
