शिमला, 28 जनवरी (हि.स.)। जिला शिमला को बेसहारा पशु मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा विशेष अभियान अपेक्षा से ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। प्रशासन के शुरुआती सर्वेक्षण में जिले में 272 बेसहारा पशुओं की पहचान की गई थी, लेकिन अभियान शुरू होने के बाद यह संख्या लगातार बढ़ती चली गई। अब तक जिला प्रशासन 472 बेसहारा पशुओं को सड़कों और सार्वजनिक स्थानों से रेस्क्यू कर गौसदनों तक पहुंचा चुका है। यह संख्या तय लक्ष्य से करीब 200 अधिक है, जिससे यह स्पष्ट हुआ है कि अभियान शुरू होते ही कई लोगों ने अपने पालतू पशुओं को सड़कों पर छोड़ दिया।

उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने बताया कि जिला प्रशासन का लक्ष्य 1 जनवरी 2026 तक शिमला को पूरी तरह बेसहारा पशु मुक्त जिला बनाना था। इस दिशा में काम करते हुए पहले चरण में चिन्हित किए गए 272 बेसहारा पशुओं को गौसदनों में पहुंचा दिया गया था, लेकिन इसके बाद भी लगातार नई सूचनाएं मिलती रहीं। 28 जनवरी तक चलाए गए अभियान में कुल 472 पशुओं को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति चिंता का विषय है कि केवल एक महीने के भीतर करीब 200 पशु और सड़कों पर छोड़ दिए गए।
उपायुक्त ने कहा कि पशुधन हमारी सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहर है और इन्हें इस तरह बेसहारा छोड़ना न केवल अमानवीय है, बल्कि कानून और समाज दोनों के लिए गलत है। उन्होंने जिन लोगों ने अपने पशु छोड़े हैं, उनसे अपील की कि वे अपने पशुओं को वापस ले जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि सर्दियों के मौसम में बेसहारा पशुओं के लिए जान का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि ठंड, दुर्घटनाओं और बीमारियों का जोखिम रहता है। प्रशासन द्वारा रेस्क्यू अभियान शुरू किए जाने के बाद कुछ लोगों ने यह मान लिया कि पशु छोड़ देने पर प्रशासन खुद ही उनकी जिम्मेदारी उठा लेगा, जो बिल्कुल गलत सोच है।
उपायुक्त ने आम जनता से भी सहयोग की अपील करते हुए कहा कि यदि कहीं कोई व्यक्ति अपने पशु को सड़कों पर छोड़ता हुआ दिखाई दे, तो इसकी सूचना तुरंत उपायुक्त कार्यालय को दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। जिला प्रशासन ऐसे मामलों पर सख्ती से कार्रवाई करने की तैयारी में है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति अपने पशुओं को बेसहारा छोड़ने का साहस न करे।
पशुपालन विभाग के अनुसार जिले के विभिन्न क्षेत्रों से रेस्क्यू किए गए पशुओं को अलग-अलग गौसदनों में पहुंचाया गया है। शिमला शहर क्षेत्र से पांच बेसहारा पशुओं को सुन्नी और टुटू स्थित गौसदनों में भेजा गया। ठियोग क्षेत्र से 118 पशुओं को छैला, मतियाना, शिलारू, कोटखाई और कलबोग से रेस्क्यू कर घुंड बलसन वासी गौसदन बलघर, श्रीकृष्ण गौशाला मल्कू माजरा बद्दी और हांडा कुंडी कैटल सेंचुरी नालागढ़ पहुंचाया गया। ज्यूरी क्षेत्र के तहत 175 पशुओं को नारकंडा, ओडी, ज्यूरी, कंडयाली, तकलेच, पिपटी, बधाल, नगर परिषद रामपुर और कुमारसैन क्षेत्र से रेस्क्यू कर ज्यूरी के विभिन्न गौसदनों सहित बद्दी और नालागढ़ के गौसदनों में भेजा गया। रोहड़ू क्षेत्र से 51 पशुओं को नगर परिषद रोहड़ू, मेंहदली, समाला, हाटकोटी और जुब्बल से रेस्क्यू कर रोहड़ू के गौसदन में रखा गया, जबकि चौपाल क्षेत्र से 123 बेसहारा पशुओं को नेरवा बाजार और आसपास के इलाकों से रेस्क्यू कर विभिन्न गौसदनों में भेजा गया।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा
