भुवनेश्वर, 22 फ़रवरी (हि.स.)। शैलबाला महिला स्वायत्त महाविद्यालय को विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग को लेकर चल रही बहस के बीच उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा है कि राज्य सरकार ने इस मांग को नजरअंदाज नहीं किया है और इस पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी निर्णय से पहले संस्थान के आधारभूत ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी जाएगी और उसके बाद शैक्षणिक वातावरण को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार उचित समय पर इस संबंध में उपयुक्त निर्णय लेगी।

शनिवार को छात्रों ने अपनी मांग को लेकर दिनभर धरना प्रदर्शन किया। बाराबती-कटक विधायक सोफिया फिरदौस और भाजपा नेता श्रीतम दास धरना स्थल पर पहुंचे और छात्रों से बातचीत की। चर्चा और समझाइश के बाद देर रात छात्रों ने अपना धरना वापस ले लिया।
इससे पहले छात्रों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रश्न उठाया कि 113 वर्ष पुराने इस संस्थान को अब तक विश्वविद्यालय का दर्जा क्यों नहीं दिया गया। छात्र पिछले 28 दिनों से लगातार धरना दे रहे थे।
मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा, “हम इस मांग को ठुकरा नहीं रहे हैं। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत की है और आगे भी चर्चा होगी। उसके बाद सरकार उचित निर्णय लेगी। यदि वास्तव में शैलाबाला का विकास करना है तो दूसरे परिसर का विकास, भूमि आवंटन और आवश्यक स्टाफ की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। किसी संस्थान को विश्वविद्यालय में उन्नत करने में लगभग 50 से 70 करोड़ रुपये का खर्च आता है, जबकि नया विश्वविद्यालय स्थापित करने में लगभग 300 से 350 करोड़ रुपये तथा नियमित व्यय की आवश्यकता होती है। इसलिए विश्वविद्यालय का दर्जा देने से पहले आधारभूत संरचना का विकास जरूरी है।”
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता महंतो
