
राजसमंद, 08 फ़रवरी (हि.स.)।

पुष्टिमार्गीय वल्लभ सम्प्रदाय की प्रधान पीठ नाथद्वारा श्रीनाथजी की हवेली में रविवार को तिलकायत राकेश महाराज की आज्ञा से पाट उत्सव धूमधाम से मनाया गया ।

श्रीनाथजी मंदिर में फाल्गुन सप्तमी के दिन परंपरानुसार पाटोत्सव मनाया जाता है, विक्रम संवत् 1728 फाल्गुन वद सातम के दिन ही प्रभु श्रीनाथजी को नाथद्वारा के मंदिर में पहली बार तिलकायत श्री दामोदरजी (दाऊजी) प्रथम महाराज ने पाट पर विराजित किया था। तभी से आज तक इस दिन पाटोत्सव मनाया जाता है।
श्रीजी प्रभु की हवेली में पाटोत्सव पुष्टी परंपरा से सराबोर होकर मनाया गया, इस अवसर पर श्रीजी प्रभु के संग श्रीनवनीत प्रियाजी को अनूठे श्रृंगार से सुशोभित कर राग व भोग सेवा के लाड लड़ाए गए, विशेष भोग अरोग़ाए व राजभोग के दौरान ठाकुरजी को गुलाल व अबीर से फाग खिलाया गया, मुखियाजी ने श्रीजी प्रभु की गुलाल से दाढ़ी रंगी तथा पोटली में गुलाल भरकर भक्तों पर छिड़काव किया।
आज से श्रीजी की हवेली में भरपूर गुलाल, अबीर उडनी शुरू हो जाएगी, वहीं आज से हवेली में रसिया गान की धूम भी शूरू हो गई । ब्रजवासी ग्वाल बालों ने सखा भाव से ढफ की थाप पर रसिया गाकर ठाकुरजी को रिझाया ।
जानकारी के अनुसार पुष्टिमार्ग में पाटोत्सव का अर्थ केवल सिंहासन पर विराजना नही है, श्रीनाथजी का पाटोत्सव पुष्टिमार्ग में एक विशेष, विलक्षण और अनुपम स्थान रखता है ।
निकुंज नायक श्रीनाथजी का पाटोत्सव समस्त वल्लभकुल में बड़े हर्ष, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इसका कारण अत्यंत गूढ़, भावपूर्ण और तत्त्वप्रधान है।
रविवार रात्रि को मंदिर के खर्च भण्डार स्थित प्रचीन मंदिर में विराजित चित्रजी की विशेष सेवा होगी तथा केसर युक्त दूध का भोग आरोगाया जाएगा ।
उल्लेखनीय है कि प्रभु सिंह जी मंदिर में बसंत पंचमी से ही गुलाल उड़ाने के साथ प्रारंभ हो जाती है जो पूरे 40 दिन तक चलती है इसका समापन होली डोल उत्सव के दिन होता है। इस बार होली का त्यौहार 2 मार्च को मनाया जाएगा जबकि होलिका दहन 3 मार्च को प्रातः सूर्योदय के समय होगा और उसी दिन ठाकुर जी में डोल उत्सव भी मनाया जाएगा
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हिन्दुस्थान समाचार / Giriraj Soni
