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मालदा, 05 अप्रैल (हि.स.)। एक साल पहले की दर्दनाक घटना का घाव आखिरकार जानलेवा साबित हुआ। ओडिशा में कथित तौर पर अमानवीय यातना का शिकार हुए आदिवासी युवक विनय बेसरा ने रविवार को निधन हो गया। वह मालदा जिला अन्तर्गत गाजोल इलाके के चिलिमपुर गांव के निवासी थे। उनके निधन के बाद पूरे गांव में शोक के साथ-साथ गहरा आक्रोश भी देखा जा रहा है।
बताया जा रहा है कि पिछले साल अगस्त में विनय बेसरा रोजगार की तलाश में ओडिशा के बालेश्वर गए थे। आरोप है कि वहां बांग्ला भाषा में बात करने पर उन्हें ‘बांग्लादेशी’ समझकर बेरहमी से पीटा गया। यहां तक कि ओडिशा पुलिस पर भी मारपीट के आरोप लगे थे। गंभीर रूप से घायल हालत में विनय किसी तरह अपने घर लौटे थे।
उस समय तृणमूल महासचिव अभिषेक बनर्जी ने उनकी मदद करते हुए इलाज के लिए आर्थिक सहायता दी थी। लंबे समय से इलाज के बाद भी उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया।
विनय की मौत के बाद उनका परिवार पूरी तरह टूट गया है। उनकी सात साल की बेटी अनाथ हो गई है, जबकि बुजुर्ग दादा के सामने अब सहारे का सवाल खड़ा हो गया है।
इस घटना को लेकर इलाके में राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि भाजपा शासित राज्य में सिर्फ बंगाली बोलने की वजह से विनय को प्रताड़ित किया गया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर हमलावर हो गई है।
तृणमूल उम्मीदवार प्रसेंजीत दास ने परिवार से मुलाकात कर घटना को मानवता पर कलंक बताया और न्याय की मांग की।
हिन्दुस्थान समाचार
