सतना, 07 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सतना जिले के उचेहरा ब्लॉक स्थित भरहुत गांव से इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। जन्म के महज डेढ़-दो घंटे बाद एक नवजात बालक को जंगल क्षेत्र में बोरे में बंद कर छोड़ दिया गया। समय रहते ग्रामीणों की सतर्कता, सरपंच की संवेदनशीलता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बच्चे की जान बचाई जा सकी।

जानकारी अनुसार शनिवार सुबह शौच के लिए निकले ग्रामीणों को जंगल की ओर से नवजात के रोने की आवाज सुनाई दी। आवाज का पीछा करते हुए जब वे जंगल के अंदर पुरातत्व विभाग की बाउंड्रीवॉल के भीतर मौके पर पहुंचे, तो कपड़े में लिपटा एक मासूम बोरे के अंदर मिला। यह दृश्य देखकर ग्रामीण स्तब्ध रह गए और तत्काल गांव की सरपंच माया देवी को सूचना दी।

जन्म के कुछ घंटे बाद छोड़ा गया
सूचना मिलते ही सरपंच माया देवी ने उचेहरा थाने को अवगत कराया। मौके पर पहुंचे सहायक उपनिरीक्षक संतोष सिंह, आरक्षक संतोष वर्मा, कौशल गुर्जर और महिला आरक्षक शिवानी मेहरा ने नवजात को सुरक्षित बाहर निकालकर तुरंत सिविल अस्पताल उचेहरा पहुंचाया। अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने बताया कि बच्चा अस्पताल पहुंचने से करीब डेढ़ से दो घंटे पहले ही जन्मा था। नवजात की नाल तक नहीं कटी थी और शरीर पर गंदगी लगी हुई थी। चिकित्सकों ने तत्काल नाल काटकर बच्चे की साफ-सफाई की और आवश्यक उपचार दिया। डॉक्टरों के अनुसार यदि कुछ समय और बीत जाता, तो बच्चे की जान को गंभीर खतरा हो सकता था। फिलहाल नवजात की हालत स्थिर है।
सरपंच बनीं सहारा
घटना के बाद सरपंच माया देवी ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए नवजात की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। वे अस्पताल में लगातार मौजूद रहकर बच्चे की देखभाल कर रही हैं। सरपंच का कहना है कि प्रशासन की ओर से आगे की व्यवस्था होने तक वह बच्चे को अकेला नहीं छोड़ेंगी।
डॉक्टर बोले- बच्चा पूरी तरह स्वस्थ
उचेहरा अस्पताल के बीएमओ डॉ. ए.के. राय ने बताया कि नवजात को सुबह करीब 10:30 बजे अस्पताल लाया गया था। उस समय बच्चे का नाड़ा लटक रहा था और शरीर ठंडा था। ड्यूटी डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ ने तुरंत नाल काटकर बच्चे को साफ किया और शिशु गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कर प्राथमिक उपचार दिया। डॉ. राय के अनुसार बच्चे का वजन लगभग साढ़े तीन किलो है और वह पूरी तरह स्वस्थ है। जन्म के बाद आवश्यक फीडिंग भी कराई गई है। बेहतर निगरानी के लिए नवजात को एससीएनयू वार्ड में भर्ती कर जिला अस्पताल सतना रेफर किया गया है।
पुलिस जांच में जुटी
थाना प्रभारी सतीश मिश्रा ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। आशंका है कि सामाजिक दबाव या पारिवारिक कारणों से नवजात को लावारिस छोड़ा गया, हो सकता है। पुलिस आसपास के गांवों, स्वास्थ्य केंद्रों, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं से जानकारी जुटा रही है, ताकि बच्चे को छोड़ने वालों की पहचान की जा सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे
