-संसदीय परम्पराओं की अनदेखी के भी लगे आरोप

देहरादून, 10 मार्च (हि. स.)। उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को नियम 300 के अंतर्गत विभिन्न जनहित के मुद्दों पर सदस्यों ने सरकार का ध्यान आकर्षित किया। कार्यरत लगभग 426 प्रार्थी शिक्षकों के विनियमीकरण की मांग, जनपद बागेश्वर में 352 राज्य आंदोलनकारियों की पुनः जांच कर उन्हें पहचान पत्र जारी करने का मामला तथा हरिद्वार जनपद के भगवानपुर क्षेत्र में 33/11 केवी विद्युत सब-स्टेशन की स्थापना की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
सदन में जनपद उत्तरकाशी की यमुना घाटी (रवाई क्षेत्र) को पृथक जनपद बनाने का मुद्दा भी उठा। सदस्यों ने क्षेत्र की भौगोलिक दुर्गमता, सीमावर्ती स्थिति, जिला मुख्यालय से लंबी दूरी तथा विकास संबंधी चुनौतियों का हवाला देते हुए इसे अलग जनपद घोषित करने की मांग की। इसके अलावा ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र के एक राजस्व ग्राम से जुड़े भूमि प्रकरण और वन विभाग की कार्रवाई का विषय भी सदन में उठाया गया।
इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष को पर्याप्त अवसर नहीं दे रही है और सदन की परंपराओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के 22 सदस्याें के प्रस्तावों को भी सूचीबद्ध किया जाना चाहिए। इस पर सत्ता पक्ष की ओर से आपत्ति जताई गई और अध्यक्ष के विवेकाधिकार का हवाला दिया गया। इस पर कुछ समय के लिए सदन में हंगामा भी हुआ। कार्यवाही के दौरान विभिन्न प्रतिवेदन एवं लेखा परीक्षाओं से संबंधित दस्तावेज भी सदन पटल पर रखे गए, जिनमें भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्टें तथा राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण से जुड़े प्रतिवेदन शामिल रहे। अध्यक्ष ने सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने और नियमों के अंतर्गत अपनी बात रखने की अपील की।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय
