हमीरपुर, 21 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के सुमेरपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत बिलहड़ी में साफ-सफाई और कूड़ा निस्तारण के उद्देश्य से लाखों रुपये की लागत से बनाए गए आरआरसी (रिसोर्स रिकवरी सेंटर) ग्रामीणों के अनुसार पूरी तरह बेमकसद साबित हो रहे हैं। आरोप है कि सेंटर में ताला लटकने के बाद भी कागजों में कूड़ा निस्तारण दिखाकर हर माह खर्च निकाला जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है।

ग्रामीण ज्ञान सिंह, प्रीतम प्रजापति व नरेश सिंह का कहना है कि आरआरसी सेंटर में न तो नियमित रूप से कूड़ा पहुंचाया जा रहा है और न ही उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण हो रहा है। गांव के विभिन्न स्थानों पर लगाए गए कूड़ादान लंबे समय से भरे पड़े हैं। कूड़ा न उठने के कारण उनसे तेज दुर्गंध उठ रही है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों का जीना मुहाल हो गया है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत कागजों में साफ-सफाई दिखाई जा रही है, लेकिन धरातल पर कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है।

कूड़ा उठान के लिए न तो समय निर्धारित है और न ही कोई जिम्मेदार कर्मचारी दिखाई देता है। कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। लोगों का यह भी कहना है कि बारिश के दिनों में कूड़े से निकलने वाला गंदा पानी गलियों में फैल जाता है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि आरआरसी सेंटर के संचालन और कूड़ा निस्तारण में हो रहे खर्च की जांच कराई जाए तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि गांव में स्वच्छता व्यवस्था वास्तव में सुधर सके।
एडीओ पंचायत सुरेश कुमार ने शनिवार को बताया कि ग्राम पंचायत में रिक्शा नहीं है, इस वजह से कूड़ा आरआरसी सेंटर नहीं पहुंच पा रहा है। जिसके कारण ताला लगा हुआ है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज मिश्रा
