
रामगढ़, 14 मार्च (हि.स.)। जिले में लोक अदालत में समझौते के आधार पर एक बड़ा मुद्दा सुलझ गया। पिछले 30 वर्षों से भैरवा जलाशय परियोजना के विस्थापितों को कोर्ट के चक्कर से निजात मिल गई। शनिवार को झालसा के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा लगाए गए राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 10188 मामलों का निष्पादन हुआ। इन मामलों के लिए समझौता राशि 12 करोड़ 2 लाख 79 हजार 641 रुपए तय हुई। डालसा के सचिव अनिल कुमार ने बताया कि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तौफीकुल हसन के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन व्यवहार न्यायालय परिसर में हुआ। उन्होंने बताया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में भैरवा जलाशय के विस्थापितों से जुड़े 300 से अधिक मामले 30 वर्षों से लंबित थे। उन सभी मामलों में सुनवाई हुई और 172 वादों का समाधान कर दिया गया।

इसके अलावा विभिन्न विधिक विषयों से जुड़े मामलों का निपटारा किया गया। इनमें पारिवारिक विवाद, विद्युत अधिनियम से संबंधित मामले, भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवाद, नागरिक और आपराधिक अपील, बैंक एवं बीमा से जुड़े मामले, राजस्व संबंधित मामला, चेक बाउंस और मोटर वाहन दावों के मामले निष्पादित किया गया। लोक अदालत एक वैकल्पिक विवाद समाधान प्रक्रिया है। जहां मामलों का निपटारा आपसी सहमति से किया जाता है। मामलों का शीघ्र समाधान होता है और न्यायालय शुल्क की बचत दोनों पक्षों के बीच आपसी संबंधों में सुधार, न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाले समय और संसाधनों की बचत होती है।
राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए 07 बेंचों का गठन किया गया था। पहले बेंच में जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम विशाल श्रीवास्तव और अधिवक्ता नितेश कुमार, दूसरे बेंच में मुख्य न्यायाधीश दंडाधिकारी मनोज कुमार राम और अधिवक्ता अमरनाथ बंका, तीसरी बेंच में अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संदीप कुमार बर्तम एवं अधिवक्ता अमरनाथ बंका, चौथे बेंच में सिविल जज द्वितीय संजीबिता गुईं, अधिवक्ता बीबी जाहिदा खातून, पांचवें बेंच में अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी हर्षित तिवारी शामिल थे। वहीं छठे बेंच में स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष प्रदीप कुमार चौरसिया और अधिवक्ता विघ्नेश दुबे तथा सातवें बेंच में कंज्यूमर फोरम के अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ला, सदस्य कुमारी नीना सिंह और अधिवक्ता जितेंद्र कुमार शामिल थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश
