खूंटी, 21 मार्च (हि.स.)। जिला मुख्यालय खूंटी सहित आस-पास के गांवों में शनिवार को प्रकृति महापर्व सरहुल हर्षोल्लास एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। गांवों के पहान एवं सरना धर्म गुरुओं की अगुवाई में सरना स्थलों पर भगवान सिङबोंगा की पूजा-अर्चना की गई तथा पूर्वजों को याद कर सुख-समृद्धि की कामना की गई।

सुबह पहानों द्वारा घड़ों में रखे सगुन जल का अवलोकन कर मध्यम वर्षा एवं अच्छी फसल होने की भविष्यवाणी की गई, जिससे किसानों में उत्साह देखा गया।
इसके पश्चात विभिन्न गांवों से सरना धर्मावलंबी पारंपरिक वेशभूषा में सखुआ फूल, अरवा चावल, जल एवं सरना झंडों के साथ कचहरी मैदान में एकत्रित हुए। यहां से अपराह्न में भव्य सरहुल शोभायात्रा निकाली गई, जो मुख्य पथ से शहर के भगत सिंह चौक होते हुए नेताजी चौक तक गई, फिर वहां से वापस कचहरी मैदान पहुंचकर संपन्न हुई।
शोभायात्रा के दौरान जदुर, ओरजदुर, चिटिद एवं गेना जैसे पारंपरिक गीतों से वातावरण गूंज उठा। महिलाएं बालों की कोपा और पुरुष कानों में सखुआ फूल लगाकर ढोल-नगाड़े व मांडर की थाप पर नाचते-गाते नजर आए। शोभा यात्रा मार्ग में स्थापित स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाओं पर सखुआ फूल अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।
इस अवसर पर धर्मगुरु बगरय मुंडा ने कहा कि सरहुल पर्व को प्रेम, भाईचारा एवं एकता के साथ मनाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरहुल महोत्सव एवं शोभायात्रा को सरकार द्वारा घोषित अवकाश के दिन ही सभी स्थानों पर आयोजित किया जाए, ताकि लोग सरकारी छुट्टी के लाभ से वंचित न रहें। साथ ही समाज के बिखरे लोगों को एकजुट कर सरना धर्मावलंबियों की धार्मिक एवं सामाजिक अस्मिता को संरक्षित रखने पर बल दिया।
कार्यक्रम में सुगुन दास मुंडा, सुधा मुंडू, मथुरा कंडीर, सनिका बोदरा, विश्राम टुटी, कुंवर पहान, फागुनी हस्सा, सुभासिनी पुर्ती, मंगा ओड़ेया, जीतु पहान, दीपा डोढरय, सोमा मुंडा, सनिका तिड़ू, सोमा पहान, फागु सिंह मुंडा, जेठा पहान, मंगरा पहान, सुगना पहान एवं सुखराम पहान सहित समाज के अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मिश्रा
