कानपुर, 10 फरवरी (हि.स)। डिजिटल अनुशासन केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि कार्यालय की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रत्येक कर्मचारी की सतर्कता ही शासकीय तंत्र को साइबर खतरों से सुरक्षित रख सकती है। नियमित कृमि मुक्ति की तरह ही साइबर सुरक्षा भी सतत प्रक्रिया है, जिसे दैनिक कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाना आवश्यक है। यह बातें मंगलवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कही।

डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों और ऑनलाइन जोखिमों को देखते हुए मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में ‘सेफर इंटरनेट डे’ के अवसर पर साइबर सुरक्षा विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटल अनुशासन एवं साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।

कार्यशाला का संचालन जिला सूचना विज्ञान अधिकारी एवं ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर द्वारा किया गया। इसमें इंटरनेट के सुरक्षित, जिम्मेदार और सकारात्मक उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि पासवर्ड, ओटीपी, बैंक विवरण जैसी संवेदनशील जानकारियां किसी के साथ साझा न करें। सोशल मीडिया पर सोच-समझकर पोस्ट करें और साइबर बुलिंग, ऑनलाइन ठगी व फर्जी खबरों से सावधान रहें।
कार्यालयी व्यवस्था के तहत ऑफिस ई-मेल का प्रयोग केवल आधिकारिक कार्यों के लिए करने, अनजान ई-मेल या अटैचमेंट खोलने से पहले सत्यापन करने और फिशिंग कॉल से सतर्क रहने के निर्देश दिए गए। टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अपनाने, सिस्टम लॉक रखने, अधिकृत सॉफ्टवेयर के उपयोग तथा नियमित एंटीवायरस अपडेट पर भी जोर दिया गया।
ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर ने बिना अनुमति सोशल मीडिया पर प्रसारित फोटो या वीडियो हटवाने के लिए उपलब्ध पोर्टल की जानकारी दी। कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी (भू-अधिग्रहण) संतोष कुमार राय, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी अंजन कुमार गोस्वामी सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप
